पहले लोग पैदल और तांगे से आते थे मेला
तामेश्वरनाथ मेला: लोगों ने साझा की अतीत की यादें
हरिहरपुर (संतकबीरनगर)। संसाधन बढ़े तो दूरियां भी सिमट गईं। आज सामान की ढुलाई के लिए तांगा और बैलगाड़ी कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। 70-80 के दशक में यही संसाधन लोगों के लिए यात्रा का जरिया थे।
हरिहरपुर निवासी अनिमेष पांडेय, तामेश्वरनाथ निवासी अभय नाथ भारती ने बताया कि 70-80 के दशक में लोग झुंड बनाकर तामेश्वरनाथ मेले में आते थे। तब संसाधन के नाम पर तांगे की सवारी थी। दूरदराज से मेले में आने वाले लोग बैलगाड़ी से आते थे और यहां रात्रि विश्राम भी करते थे। दूसरे दिन मेला कर घर के लिए प्रस्थान करते थे। मेले में ही दूरदराज से आए संबंधियों से मुलाकात हो जाती थी।
सोमवार को महाशिवरात्रि मेले के सातवें दिन तामेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लोगों ने जलाभिषेक किया। परिसर में पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों को भी सोमवार का बेसब्री से इंतजार रहता है। परिसर में फूल, बेलपत्र और पूजा के सामान बेचने वाले दुकानदार रविवार शाम ही सामग्रियों की व्यवस्था कर लेते हैं।
लकड़ी की दुकानों पर तख्त, कुर्सी, मेज के खरीदारों की भीड़ रही। पोखरे में नौकायन का भी लोगों ने आनंद उठाया। पूर्व प्रधान नरेंद्र नाथ भारती ने बताया कि मेला परिसर में भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य ब्रह्म शंकर भारती, शक्ति दत्त भारती, प्रधान के प्रतिनिधि डॉ. राम सुरेश पासवान ने बताया कि मेले में आने वाले लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए कमेटी के जिम्मेदार परिसर की निगरानी के लिए मौजूद रहते हैं।