शहर के गोला बाजार में जन साहित्यिक मंच की कवि गोष्ठी में कवि-स्रोत कवि
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल सभागार में मासिक काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने सिर्फ मैं, हम की जरूरत नहीं है, कोई किसी को समझे फुर्सत नहीं है के जरिए शुरूआत की।
ओम प्रकाश गौतम ने यूं छलकते आंसुओं की अपने जायां मत करो, हर जगह पर जख्म को अपने नुमायां न करो, सुनाया जिसे सराहा गया। राधेश्याम मिश्र श्याम ने नए वर्ष के आने में बस तीन दिवस है शेष, एडवांस में हैप्पी न्यू ईयर श्याम कर रहा पेश, सुनाकर सभी को नए वर्ष की अग्रिम बधाई दी। राजेंद्र बहादुर हंस ने जल बेच देंगे वो थल बेच देंगे, चांदों सितारे सकल बेच देंगे, सुनाकर शासन द्वारा प्राकृतिक संपदा बेचे जाने की ओर इशारा किया। सूरज कुंवर सरस ने कोई गरीब जो टैरिफ की मार से था घायल, उसे पुरानी ही कथरी ही खुदा का घर है, सुनाकर गरीबों की हालत को बताया।
राजेश मृदुल ने किसी के ख्वाब का गहना किसी दिल की अमानत हूं, किसी चेहरे की रौनक हूं किसी की मैं अलामत हूं, सुनाया जिसे पसंद किया गया। देवानंद बच्चन देव ने प्यार से आइए प्यार ही पाइए, प्यार को इस तरह से न ठुकराइए, सुनाकर प्यार से रहने की सलाह दी। अवधेश पांडेय ने गीता की सौगंध कहूंगा जो भी केवल सत्य कहूंगा, जो मरता हो मरे किंतु मैं नहीं मरूंगा, सुनाकर आत्मा की अमरता का बताया। अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने साल पचीसी इस तरह देकर जाता चोर, बात-बात पर दे रहा कैसा कैसा खोट, सुनाकर अपनी पीड़ा को बताया। इस दौरान हामिद खलीलाबादी, सरदार हरिभजन सिंह, शिवा पांडेय, अविनाश पांडेय, विपिन चंद्र जोशी आदि ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की।