खलीलाबाद नगर पालिका की बढ़ेगी सीमा, 16 ग्राम पंचायतें होंगी शामिल
कैबिनेट की बैठक में सीमा विस्तार के प्रस्ताव पर लगी मुहर, वर्ष 2016 में भेजा गया था प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। आखिरकार साढ़े साल से लंबित सीमा विस्तार के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति मिल गई। नई सीमा में 16 नई ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। इससे पालिका क्षेत्र का क्षेत्रफल बढ़ेगा ही, सीमा में आने वाले 16 ग्राम पंचायतों के करीब 45 हजार नागरिकों की सुविधाएं भी बढ़ेंगी। सीमा विस्तार के बाद अधिकारी आगे की प्रक्रिया में जुट गए हैं।
वर्ष 1963 में खलीलाबाद अधिसूचित क्षेत्र घोषित हुआ था। 1981 में खलीलाबाद को नगर पालिका परिषद का दर्जा मिला था। 25 वार्डो में बंटे नगर पालिका क्षेत्र की वर्तमान में आबादी करीब 65 हजार है। सीमा विस्तार के बाद पालिका क्षेत्र की आबादी 1.10 लाख हो जाएगी।
वर्ष 1997 में संतकबीरनगर के नाम से जनपद सृजित हुआ तो खलीलाबाद जनपद मुख्यालय बना। ऐसे में कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, बेसिक शिक्षा कार्यालय,डीआईओएस कार्यालय, एआरटीओ कार्यालय ,पुलिस आफिस, पुलिस लाइंस और डीएम- एसपी आवास आदि वर्तमान में नगर की सीमा से बाहर था।
16 जुलाई 2016 को पूर्व डीएम सरोज कुमार की ओर से नगर पालिका खलीलाबाद के सीमा विस्ताव का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। तभी से पत्रावली शासन में लंबित थी और इसके लिए लगातार डीएम और जनप्रतिनिधि के स्तर से पैरवी भी की जा रही थी।
नगर की सीमा में शामिल हुए 16 ग्राम पंचायतें
सीमा विस्तार से सरैया, मिश्रौलिया, नेदुला, पटखौली, सरौली, बड़गों, खटौली, मैलानी, मोहद्दीपुर, बेलवनिया, डीघा, कसैला, गौसपुर, बनियाबारी, सादिकगंज और उस्का खुर्द जुड़ जाएगा। इन स्थानों का विकास तेजी से होगा। यहां बसने वाले लोग शहर के दायरे में आएंगे और शहरी सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे।
नगर पालिका खलीलाबाद के सीमा विस्तार के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। नए क्षेत्र का समुचित विकास होगा। - श्याम सुंदर वर्मा, चेयरमैन
सीमा विस्तार के बाद कलेक्ट्रेट और इसके आसपास के सरकारी कार्यालय भी नगर क्षेत्र में आ जाएंगे। पालिका का बजट बढ़ेगा। इससे विकास को गति मिलेगी। नए क्षेत्र को सुनियोजित ढंग निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इससे शहर का स्वरूप भी आकर्षक होगा।
- बीना सिंह, ईओ
फोटो के साथ--
बखिरा में बहेगी विकास की बयार
नई नगर पंचायत बनाने की घोषणा से झूमे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा/ संतकबीरनगर। आखिरकार पांच साल बाद इमामुद्दीन की मेहनत रंग लाई। बुनकर महासभा के जिलाध्यक्ष द्वारा बखिरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने सितंबर 2014 मेें प्रयास शुरू किया गया था। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव पास भी हो गया। नई नगर पंचायत में 15 अन्य ग्राम पंचायतें भी शामिल होंगी। प्रस्ताव पास होते ही क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।
बखिरा में बर्तन कारोबार, प्रसिद्ध झील व पक्षी विहार समेत अन्य सरकारी व प्राइवेट संस्थानों के बावजूद ग्राम पंचायत होने से इसका विकास बाधित था। लंबे समय से बखिरा को नगर पंचायत बनाने की मांग उठ रही थी। जनप्रतिनिधियों के स्तर से पहल भी की गई थी,लेकिन सफलता हासिल नहीं मिली थी। मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल ने कहा कि बखिरा के नगर पंचायत बनने से यहां का ठप पड़ा विकास अब तेजी के साथ होगा। यहां के लोगों को शहरी सुविधाएं मिलेगी। बखिरा को नई नगर पंचायत बनाने पर हीरालाल गुप्त, हरिश्चंद्र (बचान बाबू), सुनील सिंह, दयाशंकर, राजेश गुप्त, ओमप्रकाश सिंह, चंद्रप्रकाश, जयप्रकाश, अवधनरेश कसेरा, नंदलाल, विवेकानंद त्रिपाठी, राजेश गोविल, पप्पू वर्मा, विनोद गुप्ता, सुधाकर मिश्र ने खुशी जताई।
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बखिरा नगर पंचायत में शामिल होने वाली ग्राम पंचायतें
बखिरा, तरकुलवा, अमरडोभा, लेडुआ-महुआ, झुंगिया, बूंदीपार, नौरो, सिंहोरवा, मेडरापार, बरईपार, संतोषपुर, शनिचरा, जसवल-भरवलिया, छपिया, तिलाठी, चिलवनखोर।
2015 में चला था हस्ताक्षर अभियान
बुनकर सभा के जिलाध्यक्ष इमामुद्दीन अंसारी ने बखिरा नगर पंचायत की घोषणा पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ व मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि बखिरा नगर पंचायत के लिए सितंबर 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया था। 2015 में तरकुलवा, अमरडोभा, लेडुआ महुआ, बूंदीपार व मेडरापार में नगर पंचायत गठन के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था। इसके बाद भी कई बार आंदोलन हुआ था।