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18 चिकित्सकों पर पौने चार लाख पशुओं के स्वास्थ्य का जिम्मा

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18 चिकित्सकों पर पौने चार लाख पशुओं के स्वास्थ्य का जिम्मा
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जर्जर पशु चिकित्सा केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारी व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की है कमी
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिले में पशु पालन विभाग बदहाल है। 18 पशु चिकित्सकों के जिम्मे पौने चार लाख पशुओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। इसके अलावा पशुधन प्रसार अधिकारी और चतुुर्थ श्रेणी कर्मियों की कमी बनी हुई है। यहीं नहीं 18 कंपाउंडर की जगह मात्र पांच ही तैनात हैं। 10 पशु अस्पतालों के भवन जर्जर हैं। चार जगह किराए के भवन में पशु अस्पताल संचालित हो रहा है।
जिले में पौने चार लाख पशु पंजीकृत हैं। इनमें एक लाख 50 हजार भैंसें, 75 हजार गायें, एक लाख 50 हजार बकरियां, एक हजार सुअर शामिल हैं। इसके साथ ही मुर्गियों की कोई संख्या नहीं है। इन पशुओं के इलाज के लिए जिले में 18 पशु चिकित्सालय स्थापित हैं। ये सभी पशु भवन जर्जर हालत में हैं। सांथा, बेलहर, कुस्महां, विसौवा में पशु चिकित्सालय किराए के भवन में संचालित हैं, जबकि यहां पर पशु अस्पताल बन चुका है लेकिन हैंडओवर नहीं हुआ है। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। भवन में काम नहीं होता है। पशु चिकित्सक दूसरे कमरे में बैठ कर कार्य करते हैं। यहां पर नया पशु अस्पताल बन रहा है, पर उसका कार्य अभी अधूरा है। यही हाल हैंसर, मेंहदावल, सेमरियावां, लोहरौली, नाथनगर आदि जगहों के पशु अस्पतालों का है। यहां पर भी भवन जर्जर हैं। किसी तरह से पशु अधिकारी यहां पर बैठकर कार्य करते हैं।
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18 कंपाउंडर की जगह पांच ही तैनात
जिले में 18 पशु अस्पताल हैं। इन अस्पतालों पर 18 कंपाउंडर तैनात होने चाहिए पर मात्र पांच ही हैं। करीब आठ सालों से कंपाउंडर की तैनाती नहीं होने से यह कार्य पशु अधिकारी ही करते हैं। जानवरों को टीका लगाने से लगायत अन्य जांच पशु अधिकारी के जिम्मे ही होता है।
पशुधन प्रसार अधिकारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की कमी
जिले में पशुधन प्रसार अधिकारी की कमी बनी हुई है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के अनुसार कुल 20 पशुधन प्रसार अधिकारी होने चाहिए पर 12 की ही तैनाती है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी के 40 कर्मियों के पद स्वीकृत हैं। तैनाती मात्र 20 की है।
आबादी के हिसाब से 25 अस्पताल होने चाहिए
जिले में पशुओं की आबादी पौने चार लाख के करीब है। इसको देखते हुए कम से कम 25 पशु अस्पताल होने चाहिए। इसके साथ ही 25 पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती होनी चाहिए, पर जिले में मात्र 18 पशु अस्पताल हैं।
प्राइवेट चिकित्सक लेते हैं फीस
अगर कोई पशुपालक अपने पशुओं के इलाज के लिए प्राइवेट पशु चिकित्सक को घर पर बुलाता है तो चिकित्सक दूरी के अनुरूप फीस लेते हैं। अगर दो किलोमीटर की दूरी है तो पशु चिकित्सक 100 रुपये फीस लेते हैं। इसके साथ ही दवा आदि के अलग से पैसे लेते हैं, जबकि सरकारी पशु अस्पतालों पर यह पूरी तरह से निशुल्क है।
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कोट
पशु चिकित्सक की कमी है। कुछ जगहों पर भवन जर्जर हैं। वहां पर नए भवन का प्रस्ताव है। जिला मुख्यालय का भवन जर्जर है। बगल में नया भवन बन रहा है। पशुधन प्रसार अधिकारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों और कंपाउंडर की तैनाती के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। जैसे ही वहां से कर्मी मिलते हैं, उन्हें पशु अस्पतालों पर तैनात कर दिया जाएगा।
-डॉ. संजय यादव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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