संतकबीरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने पुलिस टीम जान से मारने की नीयत से अवैध पिस्तौल से फायर करने के चार आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 13 वर्ष बाद दोष मुक्त कर दिया।
घटना तीन नवंबर वर्ष 2011 को दोपहर दो बजे दिन की है। तत्कालीन एसओजी प्रभारी पंकज कुमार सिंह मेंहदवाल बाईपास पर थे। उसी समय एसएसआई आरके राय, एसआई प्रदीप कुमार सिंह आ गए। सूचना मिली कि औद्योगिक क्षेत्र डीघा में ओसवाल फैक्टरी के उत्तर प्लाट संख्या 24 के कमरे में बिहार निर्मित अवैध असलहा की डील होने वाली है। पुलिस के पहुंचने पर चार व्यक्ति बैठे दिखाई दिए। उन्हें समर्पण के लिए कहने पर खड़े होकर भागने लगे। एक व्यक्ति ने पुलिस वालों पर निशाना बनाकर जान से मारने की नीयत से अवैध पिस्तौल से फायर किया। दोबारा फायर करने पर कारतूस मिस हो गया। इसके बाद चारों व्यक्तियों को पकड़ लिया गया।
उन लोगों के पास से दो पिस्तौल, दो रिवॉल्वर, एक तमंचा, दो अदद खाली मैगजीन, पांच कारतूस तथा 2,190 रुपये नगद बरामद हुए। थाना कोतवाली खलीलाबाद में हत्या का प्रयास, आयुध अधिनियम में केस दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट में दौरान विचारण आरोपियों ने आरोप से इंकार किया और विचरण की मांग की।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने पंकज कुमार सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, पवन कुमार चौबे, भोलानाथ पांडेय को परीक्षित कराया। बचाव पक्ष ने कहा कि गवाहों ने घटना का समय भिन्न-भिन्न बताया। कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं था। बरामद असलहों की जांच किसी ऑर्मर से नहीं कराई गई। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं पक्षों की बहस सुनने के उपरांत हत्या का प्रयास व आर्म्स एक्ट के मामले में आरोप साबित नहीं पाए जाने पर गोपाल पांडेय निवासी भिनखिनी थाना महुली, अवधेश तिवारी निवासी भरतपुरा थाना तरवारा सीवान बिहार, कमलेश मिश्रा निवासी फरेनिया थाना खलीलाबाद, अजय कुमार पांडेय निवासी बड़गहन थाना सहजनवा गोरखपुर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।