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मगहर गांधी आश्रम में दो गुट आमने-सामने

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गाँधीआश्रम मगहर में मंत्री विवाद सुलझाने पहुंची खादी ग्रामोद्योग आयोग की टीम। - फोटो : KHALILABAD
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मगहर गांधी आश्रम में दो गुट आमने-सामने
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मंत्री पद के लिए दो लोग जता रहे अपनी-अपनी दावेदारी
बगैर निर्णय लौट गई खादी ग्रामोद्योग की तीन सदस्यीय टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर के मंत्री पद का चार्ज दिलाने के लिए खादी ग्रामोद्योग आयोग की टीम मंगलवार को पहुंची। इस दौरान कर्मचारयियों के दो गुट आमने-सामने हो गए। मामला बढ़ जाने से कोई वार्ता नहीं हो सकी। इससे मजबूर होकर आयोग की टीम बिना मामला सुलझाए ही लौट गई।
क्षेत्रीय गांधी आश्रम के मंत्री पद को लेकर पिछले एक वर्ष से खींचतान चल रही है। दो लोग मंत्री पद को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं। इसके कारण गांधी आश्रम का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस मामले को सुलझाने के लिए खादी ग्रामोद्योग आयोग गोरखपुर से सहायक निदेशक पतिराम सिंह के नेतृत्व में लीगल सहायक सुग्रीव राम व खादी सहायक रामानंद यादव की तीन सदस्यीय टीम मगहर पहुंची। इसी बीच कर्मचारियों का दो गुट आपस में ही उलझ गया। इससे मामले को सुलझाया नहीं जा सका। टीम बिना कोई निर्णय लिए ही वापस चली गई। खादी ग्रामोद्योग आयोग टीम के सहायक निदेशक पतिराम सिंह ने बताया कि गांधी आश्रम को आयोग द्वारा ही फंड रिलीज होता है। ऐसे में मंत्री विवाद के कारण कार्य बाधित हो रहा है। इसे हल करने के लिए डीएम, सहायक रजिस्ट्रार गोरखपुर व खादी ग्रामोद्योग बॉम्बे के दिशा निर्देश पर टीम गठित कर मंगलवार को पूर्व सूचना पर गांधी आश्रम मगहर पहुंचीं। जहां दोनों पक्षों के वैध कागजात को देखकर निर्णय लेना था, लेकिन रामाशीष शर्मा अपने कागजात के साथ मौजूद थे, जबकि वीरेंद्र पांडेय सामने नहीं आए और उनके समर्थकों के द्वारा हंगामा किया गया। इससे उनकी टीम बिना कोई निर्णय लिए वापस चली आई।
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मंत्री के विवाद में अटका है कर्मचारियों का भुगतान
क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के मंत्री का मामला न सुलझने से यहां का काम प्रभावित हो रहा है। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। यदि जल्दी मामले का पटाक्षेप नहीं हुआ तो गांधी आश्रम में तालाबंदी से इन्कार नहीं किया जा सकता। मंत्री को लेकर असमंजस है। इस पद के लिए विरेंद्र पांडेय व राम अशीष शर्मा अपने अपने को मंत्री बता रहे हैं। इसके कारण कर्मचारी असमंजस में हैं कि सही मंत्री कौन है। कर्मचारी शिवशंकर यादव, इंद्रेश कुमार आदि का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन, सेवानिवृत्त कर्मचारियों का फंड बकाया है। इसका भुगतान न होने से वे भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। मंत्री पद का निर्णय जल्द होने से उनकी समस्याओं का जरूर हल निकलेगा।
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अलग-अलग दावे पेश कर रहे लोग
राम अशीष शर्मा ने बताया कि वह गांधी आश्रम के मंत्री हैं। उनके पास रजिस्ट्रार की प्रमाणित सूची है। वीरेंद्र पांडेय की मानें तो गांधी आश्रम के मंत्री रहे राम आशीष शर्मा को प्रबंध समिति के सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटाकर उन्हें मंत्री बनाया है। जबकि संचालक/ट्रस्टी हीरालाल श्रीवास्तव ने बताया कि मंत्री चुनने का अधिकार प्रबंध कार्यकारिणी के सदस्यों को है। जिनके द्वारा मंत्री राम आशीष शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाया गया था और उनकी जगह वीरेंद्र पांडेय को मंत्री बनाया गया था। जबकि प्रबंधकारिणी सदस्य हरिश्चंद यादव, राम मूरत राम और राधेकृष्ण शुक्ल का कहना है कि अविश्वास गलत हुआ है। संचालक दबाव में निर्णय लिए हैं।
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