गर्मी के साथ बढ़ीं बीमारियां, अस्पताल में मरीजों का तांता
चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लग रही मरीजों की लंबी लाइन
दवा काउंटर पर भी हो रही भीड़
संतकबीरनगर। गर्मी बढ़ते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। मौसम के बदलते मिजाज से बुखार, उल्टी-दस्त सहित संक्रमण के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। आम दिनों में जहां जिला अस्पताल में 1100 से 1200 लोगों की ओपीडी होती थी, इन दिनों करीब 1500 मरीजों की ओपीडी हो रही है। फिजिशियन कक्ष, बाल रोग विशेषज्ञ तथा सर्जन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लग रही है।
मंगलवार सुबह से ही जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लग गई। पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सक से परामर्श और दवा लेने तक के लिए मरीजों को मशक्कत करनी पड़ी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय ने बताया कि गर्मी में डायरिया, बुखार व अन्य बीमारियां होती हैं। ऐसे में लोगों को आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। गमछा, मास्क का प्रयोग करना चाहिए। पानी का सेवन हमेशा करना चाहिए। फिजिशियन को दिखाने आई एक मालती ने बताया कि आधे घंटे बाद पर्ची बनी है, उसके बाद डॉ. महेश प्रसाद को दिखाने के लिए लाइन में लगे है। पेट में दर्द है।
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दवा खिड़की पर पस्ज हो जाते हैं हौसले
मरीज जैसे-तैसे कर चिकित्सक तक पहुंच भी जाएं तो उसके हौसले दवा हासिल करने में पस्त हो जाते हैं। महिला और पुरुष दोनों ही खिड़कियों पर मरीजों की लंबी लाइन रहती है। एक व्यक्ति को दवा लेने के लिए औसतन 15 से 30 मिनट तक लाइन में लगना पड़ता है। बंजरिया निवासी जयकरन, ओमप्रकाश का कहना था कि घंटों से लाइन में लगे हैं, लेकिन भीड़ कम होने का नाम ही नहीं ले रही। जब भी दवा लेने आते हैं, यही स्थिति रहती है। गंभीर बीमार लोगों की हालत बिगड़ जाती है।
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गर्मी में ये बरते सावधानी
बच्चों को धूप में घर से बाहर न निकलने दें।
गंदे स्थानों पर बिक रहे खाद्य पदार्थ न खाएं।
गन्ने का रस तथा बर्फ वाली चीजें खाने से बचें।
बाहर से आकर एकदम से ठंडा पानी न पिएं।
बच्चों को नमक-चीनी का घोल दें।
मौसमी फल खूब खाएं तथा तरल पदार्थ लेते रहें।
उल्टी-दस्त होने पर बच्चों को योग्य चिकित्सक को दिखाएं।
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कोट
अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मरीजों की भीड़ लग रही है, फिर भी इलाज सहित दवा उपलब्ध कराया जा रहा है। जो भर्ती करने लायक होते हैं उन्हें भर्ती किया जाता है, नहीं तो दवा देकर घर भेज दिया जाता है।
डॉ ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस