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शांति के लिए फावड़ा उठाए एसडीएम और तहसीलदार

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शांति के लिए फावड़ा उठाए एसडीएम और तहसीलदार
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शव दफनाने की भूमि के लिए दो वर्गों के लोग आ गए थे आमने-सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सोमवार को धनघटा गांव में हुई मौत के बाद शव को दफनाने की भूमि को लेकर दो वर्गों के लोग आमने-सामने हो गए। करीब दो घंटे तक चली पंचायत के बाद मामला तब जाकर शांत हुआ जब एसडीएम और तहसीलदार ने दूसरी जगह पर खुद फावड़ा चलाकर कब्र तैयार करने का प्रयास शुरू किया।
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धनघटा निवासी मोहम्मद अकरम के 90 वर्षीय पिता मोहम्मद रशीद की मौत हो गई थी। उनके शव को दफनाने के लिए गांव के लोग ढढ़वा ताल के बगल स्थित समय माता मंदिर के करीब कब्रिस्तान में पहुंचे। उसके बाद गांव के दूसरे पक्ष के लोग भी वहां पहुंच गए। उन लोगों का कहना था कि जिस स्थान पर शव को दफनाने का प्रयास किया जा रहा है, उस स्थान पर कभी शव दफनाया नहीं गया था। यहां से 100 मीटर दक्षिण कब्रिस्तान की जमीन है, वहां पर शव दफनाया जाए। मौके पर भाजपा के मंडल अध्यक्ष नरेंद्र पांडेय और पीएन सिंह भी अपने सहयोगियों के साथ पहुंच गए थे। इसकी सूचना किसी ने एसडीएम योगेश्वर सिंह को दी तो वह भी तहसीलदार रत्नेश तिवारी के साथ मौके पर पहुंच गए। वहां करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों के लोगों के बीच बातचीत हुई। उसके बाद धनघटा निवासी व लेखपाल मोहम्मद इलियास के हस्तक्षेप पर एक पक्ष के लोग दूसरी जगह शव दफनाने को तैयार हो गए। एसडीएम योगेश्वर सिंह और तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने कहा कि दोनों पक्षों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए कब्रिस्तान में गड्ढा खोदने का शुभारंभ खुद किया उसके बाद वहां मौजूद भाजपा नेता व कार्यकर्ता भी फावड़ा चलाए। एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि समस्या का समाधान शांतिपूर्वक कर लिया गया।
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