तीन गांवों में चकबंदी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही
जंगलऊन में 30 वर्ष से चल रही चकबंदी, पांच साल में ही प्रक्रिया पूर्ण किए जाने का है प्रावधान
मार्च में बगही की चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण किए जाने की उम्मीद जता रहा विभाग
संतकबीरनगर। तमाम तरह के दांव-पेंच और सुस्त प्रक्रिया की वजह से जिले के तीन गांव ऐसे हैं, जहां चकबंदी समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही है। किसान चकबंदी कार्यालय का चक्कर काटते रहते हैं। वैसे विभाग पूरी उम्मीद जता रहा है कि इन तीन गांवों में से एक गांव की चकबंदी इस साल मार्च तक जरूर पूरी कर देगा।
चकबंदी की प्रक्रिया पूरी करने का अधिकतम समय 60 महीने यानी पांच साल निर्धारित है। जिले के जंगलऊन में वर्ष 1990 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। जबकि जंगल बेलहर में वर्ष 209 से और बगही में वर्ष 2005 से चकबंदी चल रही है। आलम यह है कि जंगलऊन में 30 वर्ष गुजर गए और अभी गांव चकबंदी प्रक्रिया में ही है। यही हाल जंगल बेलहर और बगही गांव का भी है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जंगलऊन में वन विभाग की जमीन का पेंच फंसा है। जंगलऊन में अभी धारा दस की प्रक्रिया अर्थात जमीन की कीमत के मुकदमे का निस्तारण कार्य चल रहा है। जबकि जंगलऊन में अभी रिकॉर्ड बनाया जा रहा है। बगही में प्रगति कुछ अच्छी है। यहां निगरानी लंबित है। वैसे तो जिले में कुल 75 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया में शामिल है। इसमें प्रथम चक्र के 20 गांव और द्वितीय चक्र के 53 गांव हैं। इस वित्तीय वर्ष में दो गांव लौकी मिश्र और पियसिया का गजट हुआ है। धारा आठ अर्थात पड़ताल में छह गांव जमालपुर, सीयरखुर्द, मिश्रौलिया मिश्र, पतजीव, बनकसिया और बेलौहा शामिल हैं। धारा नौ कीमत विनिमय अनुपात में जमालपुर, ददरा, मिश्रौलिया मिश्र हैं। धारा 10 कीमतों के मुकदमों के निस्तारण प्रक्रिया में छह गांव भिटहा, जमुरिया कला, बढ़या, डेबरी, भदाह और अशरफपुर शामिल हैं। धारा 20 चक बनाने में दुधरा कला, मुरादपुर और धारा 24 कब्जा परिवर्तन में पियसिया और धरमपुर पैता गांव शामिल हैं।
सीओ और एसीओ की कमी भी सुस्त प्रक्रिया का कारण
जिले में चकबंदी विभाग में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पद पर लंबे समय से उधार के अधिकारी कार्य करते रहे हैं। अभी कुछ महीने पूर्व चौधरी सुरेंद्र प्रसाद की नियुक्ति बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के पद पर तैनाती हुई। उसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई है। इसके अलावा सीओ चकबंदी के पांच और एसीओ चकबंदी के दस पद सृजित हैं। जबकि तीन सीओ और तीन एसीओ की ही तैनाती है। ऐसे में देखा जाए तो दो सीओ और सात एसीओ के पद रिक्त चल रहे हैं। इन रिक्त पदों पर तैनाती नहीं होने से काम प्रभावित हो रहा है।
कोट
यह सच है कि जंगलऊन, जंगल बेललहर और बगही में लंबे समय से चकबंदी चल रही है। उसकी पत्रावलियों का अध्ययन करके प्रक्रिया तेज करा दी गई है। पूरी उम्मीद है कि मार्च तक बगही में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण करा दी जाएगी। जबकि जंगलऊन और जंगल बेलहर में अभी वक्त लगेगा। वैसे जिले में कुल 75 गांवों में चकबंदी चल रही है। काम में तेजी लाकर प्रक्रिया की गति बढ़ाए जाने का पूरा प्रयास है। सीओ और एसीओ के रिक्त पदों पर तैैनाती किए जाने के लिए उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है।
- चौधरी सुरेंद्र प्रसाद, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी