भाकियू जिला उपाध्यक्ष की हत्या के मामले में पांच पर केस
देर रात मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
रात से ही बखिरा थाने की पुलिस मौके पर डटी हुई है
संवाद न्यूज एजेंसी
बखिरा। शनिवार की शाम को बौरव्यास चौराहे पर भाकियू के जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण पांडेय की धारदार हथियार से गांव के ही कुछ लोगों ने मिलकर हत्या कर दी थी। बेटी ने पिता की हत्या में शामिल सभी पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए देर रात ही भेज दिया था। पुलिस मामले की विवेचना में जुट गई है। उधर, देर शाम मुख्य आरोपी अजय राय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
बौरव्यास निवासी सत्या पांडेय ने बताया कि उसके पिता लक्ष्मण पांडेय गांव से बाहर मुख्य सड़क पर किसी काम से गए थे। उसके पिता को गांव के ही अजय राय ने सोनू राय, जोखन राय, माले राय व सतेंद्र राय के साथ मिलकर बौरव्यास चौराहे के निकट धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में उसके पिता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलने पर वह मां के साथ भागकर घटनास्थल पर पहुंची। सीओ अंबरीश भदौरिया ने बताया कि आरोपी अजय राय, सोनू राय, जोखन राय, माले राय और सतेंद्र राय के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
किसान नेता की मौत से क्षेत्र में सनसनी
बखिरा। शनिवार की रात को बखिरा क्षेत्र के बौरव्यास चौराहे के निकट सरेराह किसान यूनियन नेता की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद काफी देर तक आरोपी घटना में प्रयुक्त हथियार को लहराता रहा व आसपास मौजूद लोगों को गवाही न करने की धमकी भी देता रहा। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रयास किया होता तो शायद यह घटना नहीं घटित होती। समय से यदि पुलिस आ जाती तो हत्या करने के काफी देर तक घटनास्थल पर मौजूद रहे आरोपी पकड़े जा सकते थे।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण पांडेय करीब दो दशक से अधिक समय से किसान संगठन से जुड़े रहे। दर्जनों आंदोलन में किसानों की आवाज बुलंद करने वाले किसान नेता घटनास्थल पर जिंदगी व मौत से जूझ रहे थे, किंतु मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव तक नहीं किया। यदि लोगों ने बीच-बचाव किया होता तो संभवत: घटना को रोका जा सकता था। स्थिति यह रही कि बखिरा-सहजनवा मार्ग पर करीब दो घंटे तक किसान नेता का शव पड़ा रहा किंतु पुलिस भी मौके पर काफी देरी के बाद पहुंची थी, जबकि आरोपी करीब एक घंटे तक हथियार को लहराता रहा व प्रत्यक्षदर्शियों को धमकाता भी रहा। इस घटना से आसपास की दुकानें भी धड़ाधड़ बंद हो गईं।
सास को मिल रहीं पेंशन से अब होगा गुजर-बसर
बखिरा। मृतक लक्ष्मण पांडेय की पत्नी मंजू पांडेय ने बताया कि उसके पति किसान यूनियन के टिकैत ग्रुप से जुड़कर करीब दो दशक से किसान हित के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। शनिवार की शाम को वह बौरव्यास गांव के चौराहे पर किसी काम से गए हुए थे। थोड़ी देर बाद ही उनकी मौत की खबर सुनकर पूरा परिवार बदहवास होकर रोने लगा। बताया कि सत्या पांडेय (18), सावित्री (14), शिवानी (सात), अनुराग (छह) व श्वेता (पांच) पांच बच्चे हैं। बड़ी बेटी की शादी की तैयारी चल रही थी, किन्तु अब कैसे होगा, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। उसके पति अपने भाइयों में सबसे छोटे थे। दोनों भाई दिल्ली में रहकर परिवार का गुजर-बसर करते थे। घर पर खेती ही आमदनी का जरिया था। पति हमेशा किसान यूनियन के काम से बाहर ही रहते थे। ससुर की मौत के बाद उसकी सास रामपति देवी (102) को पेंशन मिलती है। इसी के सहारे परिवार का भरण-पोषण होता है। बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा, इतना कहते हुए मंजू पांडेय रोने लगीं।