शिविर में उमड़े चालक, आंखों की कराई जांच
नेत्र स्वास्थ्य शिविर में 70 चालकों की हुई जांच, 10 को अस्पताल में बुलाया
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अमर उजाला फाउंडेशन और यातायात पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को मेंहदावल बाईपास पर निशुल्क नेत्र स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ ने 70 चालकों की आंखों की जांच की और निशुल्क दवा का वितरण किया। इसके साथ ही 10 चालकों को अस्पताल में इलाज के लिए बुलाया।
शिविर में जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शिवानंद सिंह ने बताया कि चालकों की आंखों की जांच की गई। इसमें कई चालकों की आंखों में धूल चिपकी पाई गई। इसके साथ ही तीन चालकों की आंखों में ज्यादा दिक्कत मिली है। सात चालकों की आंखों में कुछ धुुंधलापन था। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल बुलाया गया। उन्होंने बताया कि सभी चालक वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। आंखों में जरा सी भी दिक्कत आए तो अस्पताल में आकर दिखाएं। यातायात निरीक्षक ब्रजेश कुमार यादव ने कहा कि नवंबर माह में यातायात माह चलाया जा रहा है। इसमें लोगों से यातायात नियमों के पालन करने की अपील की जा रही है। समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। नेत्र परीक्षण अधिकारी अनिल मिश्र ने चालकों को निशुल्क दवा का वितरण किया और जरूरी परामर्श दिया। इस दौरान मास्क का वितरण भी हुआ। इस अवसर पर हेड कांस्टेबल भोला प्रसाद, हेड कांस्टेबल अरविंद दुबे, हेड कांस्टेबल गिरजेश यादव, कांस्टेबल अजय पांडेय आदि मौजूद रहे।
बेहतर इलाज हुआ
आंख दर्द से पीड़ित शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कई दिनों से अस्पताल जाने के लिए सोच रहा था। दो दिन पहले सूचना मिली कि शिविर लग रहा है तो यहां पर दिखाने आ गए। बेहतर तरीके से उनका इलाज हुआ और दवा भी दी गई।
शिविर लगा तो चला आया
आंख की समस्या से पीड़ित सूरज ने बताया कि काफी दिनों से उन्हें धुंधला दिखाई दे रहा था। अस्पताल नहीं जा पा रहा था, पता चला कि बाईपास पर शिविर लगा है तो चला आया। यहां पर चिकित्सकों ने उनके आंख की जांच कर दवा भी दी।
दवा से मिली राहत
आंख दिखाने आए उमाशंकर ने बताया कि आंख में दर्द रहता है। इसके साथ ही साफ दिखाई नहीं देता है। शिविर में दिखाने आया तो यहां पर चिकित्सकों ने आंख में कोई दवा डाली तो उससे काफी राहत मिली है। इस तरह के शिविर लगने चाहिए।
परेशानी हुई दूर
अनिरुद्ध गुप्त ने बताया कि वह वाहन चलाते समय आंख में दिक्कत आती थी, कुछ दर्द बना रहता था, शिविर की सूचना मिली तो आंख दिखाने आया। इसके बाद डॉक्टर ने आंख की जांच की है और दवा दी। एक हफ्ते बाद बुलाया है।