532 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने की संस्तुति
छात्रों को खाद्य सुरक्षा भत्ता और खाद्यान्न वितरण में बरती है लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना काल के दौरान बंद रहे स्कूलों के बच्चों को शासन ने खाद्य सुरक्षा भत्ता और खाद्यान्न के वितरण के निर्देश दिए थे। जिले के 698 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने इसमें लापरवाही बरती और वितरण नहीं किया। बीएसए ने इन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को चेतावनी दी थी कि दो अगस्त तक वितरण की रिपोर्ट नहीं देते हैं तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद 166 स्कूलों ने अपनी रिपोर्ट देे दी। 532 स्कूलों ने रिपोर्ट नहीं दी। एमडीएम सेल ने लापरवाही बरतने वाले 532 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने की संस्तुति की है।
कोरोना काल में परिषदीय विद्यालय पूरी तरह से बंद हो गए थे। इस दौरान शासन ने विद्यालयों के बंदी के दौरान छात्रों को मध्याह्न भोजन के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता और राशन देने का आदेश जारी किया। इसके बाद सभी विद्यालयों को निर्देश दिए गए कि छात्रों में खाद्यान्न वितरण और खाद्य सुरक्षा भत्ता अभिभावकों के खाते में भेज दिया जाए। जिले के 1246 विद्यालयों में से 698 विद्यालयों ने प्रेरणा पोर्टल पर सूचना दर्ज नहीं कराई। इसके बाद इन विद्यालयों को 27 जुलाई को नोटिस जारी कर दो अगस्त तक हर हाल में खाद्यान्न वितरण और खाद्य सुरक्षा भत्ता की रिपोर्ट प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 166 विद्यालयों ने अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई और 532 विद्यालयों ने रिपोर्ट नहीं दी। जिला समन्वयक मध्याह्न भोजन डीपी चंद ने बताया कि नोटिस के बाद भी 532 स्कूलों ने प्रेरणा पोर्टल पर सूचना अपलोड नहीं की। इन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों/प्रधानाचार्य का वेतन रोकने की संस्तुति बीएसए से की गई है। प्रभारी बीएसए/डीआईओएस गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि वे विभागीय कार्य से इलाहाबाद है। आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
इन विद्यालयों पर हुई कार्रवाई
परिषदीय विद्यालय के 482 प्रधानाध्यापक, मदरसा के 15 प्रधानाध्यापक, इंटर कॉलेज के 22 प्रधानाचार्य, सहायता प्राप्त विद्यालय के छह प्रधानाचार्य शामिल हैं।