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एक ही कमरे में संचालित हो रहे तीन आंगनबाड़ी केंद्र

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प्राथमिक विद्यालय बखिरा के अतिरिक्त कक्ष में आँगनवाणी केंद्र चल रहा है। संवाद - फोटो : KHALILABAD
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एक ही कमरे में संचालित हो रहे तीन आंगनबाड़ी केंद्र
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विधायक के गांव मेड़रापार के आंगनबाड़ी केंद्र पर लटक रहा था ताला
नामांकित संख्या से बेहद कम मिले बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा/संतकबीरनगर। बाल विकास परियोजना बघौली क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बेहाल है। एक ही कमरे में तीन-तीन केंद्र संचालित होते पाए गए। कहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लटक रहा था और कहीं केंद्रों पर नामांकित संख्या से बेहद कम बच्चे उपस्थित मिले। अधिकांश केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं। खुद सीडीपीओ तक को केंद्रों की वास्तविक स्थिति का पता नहीं है।
सीडीपीओ, बघौली वीरेंद्र प्रताप त्रिपाठी ने बताया कि बघौली क्षेत्र में कुल 203 केंद्र संचालित होते हैं, लेकिन अधिकांश केंद्र परिषदीय स्कूलों में संचालित होते हैं। केंद्रों का संचालन ठीक से हो, इसके लिए समय-समय पर केंद्रों की जांच की जाती है। रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रचलित है। भर्ती होने के बाद रिक्त पदों पर तैनाती हो जाएगी। कितने केंद्र खुद के भवन में हैं और कितने उधार के भवन में संचालित होते हैं, दस्तावेज देखकर ही बता पाएंगे। डीपीओ विजय श्री ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र सोमवार और बृहस्पतिवार को खोलने के निर्देश हैं। केंद्र बंद रहना कत्तई बर्दाश्त नहीं है। केंद्रों की जांच वह खुद करेंगी और बंद पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगी। सीडीपीओ और मुख्य सेविका भी नियमित केंद्रों की जांच करते हैं। इनके जरिए बंद केंद्रों की रिपोर्ट दी जाएगी तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी। डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो गंभीर विषय है। डीपीओ, सीडीपीओ और मुख्य सेविका को खुद केंद्रों की जांच करनी चाहिए और जहां कहीं केंद्र बंद मिले और पोषाहार का वितरण न हो, संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। जिला स्तरीय अधिकारी भी समय-समय पर केंद्रों की जांच के लिए लगाए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा सुधारने के लिए सार्थक कदम उठाया जाएगा।
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सुबह 10:00 बजे
आंगनबाड़ी केंद्र बखिरा खुला मिला। करीब 12 बच्चे केंद्र पर मौजूद मिले। बखिरा कस्बे में सात आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से प्रथम, द्वितीय व तृतीय केंद्र प्राथमिक विद्यालय बखिरा प्रथम के एक ही कक्ष में चल रहा है। वैैसे तीनों केंद्रों पर 35-35 बच्चे नामांकित हैं। केंद्र पर बच्चों को महज सोमवार व बृहस्पतिवार को ही बुलाया जाता है। पोषाहार वितरण को लेकर संतोषजनक स्थिति मिली। तीनों केंद्रों के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका फिलहाल केंद्र पर मौजूद मिलीं, लेकिन बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रही। कार्यकर्ता ने बताया कि चार माह का चावल अभी केंद्र को नहीं मिला है।
सुबह 11:30 बजे
प्राथमिक विद्यालय मेड़रापार के आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटक रहा था। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि यह केंद्र खुलता नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि यह गांव मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल का है। यहां का आंगनबाड़ी केंद्र का खुद का भवन नहीं है। केंद्र प्राथमिक विद्यालय में ही चलता है। लॉकडाउन की बंदी के बाद सितंबर माह से आंगनबाड़ी केंद्र खुलने का आदेश था, लेकिन इस केंद्र पर फिलहाल ताला लटका हुआ नजर आया। यहां दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। मेड़रापार के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम की कार्यकर्ता प्रेमशीला और द्वितीय केंद्र की कार्यकर्ता शशि सिंह हैं। दोनों कार्यकर्ताओं के केंद्रों पर ताला लटका मिला। ऐसी हालत में नामांकित बच्चों को न तो पोषाहार मिल रहा है न ही गर्भवती व धात्री महिलाओं को। केंद्र के बाहर गंदगी मिली। जर्जर कमरे में चल रहे केंद्र की स्थिति बदहाल मिली। शुद्ध जल के लिए लगा हुआ इंडिया मार्क हैंडपंप भी खराब मिला है।
दोपहर 12:00 बजे
बरईपार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर कार्यकर्ता सरला सिंह मौजूद मिलीं। कार्यकर्ता सरला सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष में केंद्र विगत दो दशक से चल रहा है, लेकिन सहायिका का पद दो दशक से रिक्त चल रहा है। बगैर सहायिका के वह केंद्र को संचालित कर रही है। सहायिका की नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार कह चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पोषाहार व अनाज उन्हें समय से मिल जाता है। जिसका वितरण नामांकित बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को किया जाता है। ग्रामीणों ने भी पोषाहार वितरित होने की जानकारी दी।
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दोपहर 12:20
संतोषपुर आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालय संतोषपुर के अतिरिक्त कक्ष में चल रहा है। जबकि मिनी आंगनबाड़ी केंद्र शनिचरा को कार्यकर्ता सुषमा अपने आवास से ही संचालित कर रही हैं। संतोषपुर में दो केंद्र संचालित होता है। दोनों केंद्र एक ही अतिरिक्त कक्ष में संचालित होता है। कमरे में फर्श व टाइल्स लगा हुआ है। केंद्र साफ-सुथरा मिला। प्रथम केंद्र की कार्यकर्ता अंजू सिंह व सहायिका दुर्गावती हैं, जो केंद्र पर उपस्थित मिलीं। जबकि द्वितीय केंद्र की कार्यकर्ता शीला देवी उपस्थित मिलीं। दोनों केंद्रों पर 70 बच्चे नामांकित हैं, जबकि मौके पर 20 बच्चे मिले। ग्रामीण पोषाहार का वितरण होना बताए।
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