जीवा हत्याकांड में एक और खुलासा हुआ है। जब कोर्ट रूम में दोपहर 3:50 बजे विजय ने गोलियां दागनी शुरू कीं, उस वक्त संजीव की अभिरक्षा में दस पुलिसकर्मी थे। इनमें से दो गोली लगने से घायल हो गए। बाकी किसी ने विजय को पकड़ने का प्रयास नहीं किया और इधर-उधर भागने लगे।
कोर्ट रूम में बुधवार को गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर गोलियां बरसाने वाले विजय यादव ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान संजीव की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने न तो उसे बचाने का प्रयास किया और न ही हमलावर को पकड़ने की कोशिश की। गोलियां चलते ही सुरक्षाकर्मी भाग खड़े हुए थे। इसके बाद वकीलों ने हमलावर को पकड़ा था।
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कोर्ट रूम में दोपहर 3:50 बजे जब विजय ने गोलियां दागनी शुरू कीं, उस वक्त संजीव की अभिरक्षा में दस पुलिसकर्मी थे। इनमें से दो गोली लगने से घायल हो गए। बाकी किसी ने विजय को पकड़ने का प्रयास नहीं किया और इधर-उधर भागने लगे।
कोर्ट परिसर में मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने भी जवाबी कार्रवाई नहीं की। वकीलों ने बताया कि अगर वे सभी दौड़ाकर न पकड़ते तो हमलावर भाग निकलता। इससे संबंधित वीडियो और फोटो सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच में ये सभी शामिल किए गए हैं।
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पलक झपकते अंजाम दी थी वारदात
विजय यादव ने पलक झपकते ही वारदात को अंजाम दिया। अचानक गोलियां चलने से शायद पुलिसकर्मी भी कुछ समझ नहीं सके और अपनी जान बचाने का प्रयास करने लगे। एक वकील का कहना था कि कुछ देर तक संजीव वहीं पर तड़पता रहा, लेकिन दहशत के चलते किसी की उसे हाथ लगाने की हिम्मत नहीं हुई।
एसआईटी ने प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों के दर्ज किए बयान, घटनास्थल से जुटाए साक्ष्य
गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या के मामले में एसआईटी ने बृहस्पतिवार को तफ्तीश तेज कर दी। छह घंटे तक प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पहुंचकर सुबूत जुटाए। पुलिस ने शूटर विजय यादव के पास से उसका मोबाइल बरामद कर जांच को भेज दिया है। आशंका है कि इसका डाटा डिलीट किया गया है, जिसे रिकवर कराया जाएगा। इससे बड़े राज या फिर पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।
प्रकरण में सीएम के आदेश पर एडीजी टेक्निकल मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने तफ्तीश शुरू की थी। वारदात के वक्त जिन दस पुलिसकर्मियों की अभिरक्षा में संजीव को लाया गया था, उनके बयान दर्ज किए। कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से भी एसआईटी ने जानकारी ली।
कोर्ट की अनुमति लेकर जुटाएंगे सीसीटीवी फुटेज
एसआईटी ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज जुटाने का प्रयास शुरू कर दिया है। कोर्ट परिसर के आसपास लगे फुटेज खंगाल रही है। कोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पाने का जल्द अदालत से अनुमति ली जाएगी।
छावनी बना कोर्ट परिसर
कोर्ट रूम में हत्या के बाद आक्रोशित वकीलों ने पुलिस पर पथराव किया था। इसमें एक एसीपी घायल हो गए थे। बृहस्पतिवार को अधिवक्ता कार्य से विरत रहे। फिर भी एहतियातन कोर्ट परिसर व आसपास भारी पुलिस व पीएसी बल की तैनाती की गई है।
आरोपी को भेजा गया जेल
सीजेएम हृषीकेश पांडेय ने हत्या के आरोपी विजय यादव को न्यायिक हिरासत में लेकर 21 जून तक जेल भेजने का आदेश दिया। इससे पहले विवेचक मनोज मिश्रा ने कोर्ट में अर्जी देकर बताया कि बुरी तरह से घायल विजय को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, लिहाजा कोर्ट में लाकर पेश करना संभव नहीं है। इस पर सुनवाई के बाद सीजेएम काम खत्म करने के बाद साढ़े सात बजे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर गए और आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने का देश दिया। देर रात विजय को जेल भेज दिया गया।
पुलिस कमिश्नर छुट्टी से लौटे
पुलिस कमिश्नर एसबी शिरडकर कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर गए थे। एडीजी जोन लखनऊ पीयूष मोर्डिया के पास इसका चार्ज था। जीवा हत्याकांड के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को पुलिस कमिश्नर देर शाम छुट्टी से लौटे और आलाधिकारियों के साथ बैठक की।
विजय को मोहरा किसने बनाया
जीवा हत्याकांड को अंजाम भले ही शूटर विजय ने दिया हो, पर इसका असल किरदार अभी पर्दे के पीछे है। सवाल है कि विजय का आका कौन है? शुरुआती जांच में नेपाल के अलावा पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक तार जुड़ रहे हैं। बड़े गैंग से लेकर एक पूर्व सांसद भी जांच की जद में है। अब देखना होगा कि एसआईटी कत्ल के मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंच पाती है या नहीं।
इन सवालों के नहीं मिल रहे जवाब
1- संजीव का हमलावर से क्या कनेक्शन है?
2- हत्या करने की वजह क्या है?
3- हमलावर को रिवॉल्वर किसने और कहां मुहैया कराई?
4- मुख्य साजिशकर्ता कौन है?
5- संजीव का हमलावर से सीधा संपर्क या रंजिश नहीं है तो उसने उसे क्यों मारा?
6- क्या हमलावर अकेला था या और भी लोग बैकअप में थे?
7- हमलावर का लोकल कनेक्शन क्या है?
8- पिछले एक महीने से विजय घरवालों के संपर्क में था। आखिर उसने कहां ठिकाना बनाया था?
9- संजीव के पेशी पर आने की मुखबिरी किसने की?
10- आखिर उसने कोर्ट की सुरक्षा कैसे भेदी? क्या किसी की मिलीभगत रही?
कोर्ट रूम में जीवा की हत्या
आपको बता दें कि पुलिस हिरासत में माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि लखनऊ के एससीएसटी कोर्ट रूम में बुधवार दोपहर बाद मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा (50) की हत्या कर दी गई। वकील के लिबास में आए हमलावर ने कोर्ट रूम में ही रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ छह राउंड फायरिंग की।
इस दौरान दो पुलिसकर्मियों, एक डेढ़ साल की बच्ची व उसकी मां को भी गोली लगी। जीवा पर हमलावर ने पीछे से फायरिंग की। वारदात के बाद वकीलों ने दौड़कर हमलावर को दबोच लिया और पीटकर पुलिस को सौंप दिया। घायलों को ट्रामा में भर्ती कराया गया है।
वारदात के बाद आक्रोशित वकीलों ने प्रदर्शन कर पथराव कर दिया। जिसमें एसीपी चौक का सिर फट गया। कई वाहन भी छतिग्रस्त हो गए। आलाधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तब हालात पर काबू पा सके।