संभल। बरात से लौट रहे बाइक सवार तीन दोस्तों की मूंढापांडे में हादसे में जान चली गई। तीनों दोस्तों के परिजनों एक ही बात कह रहे हैं कि बाइक से जाने के लिए मना किया था, लेकिन वह तीनों नहीं माने और जल्दी लौटने की मंशा जाहिर करते हुए चले गए। बरात दो बजे लौट आई लेकिन वह तीनों नहीं लौटे। सवा दो बजे हादसे की जानकारी मिली। एक ओर जहां बरात की खुशियां मनाई जा रही थीं वह खुशियां गम में तब्दील हो गईं।
बरात में गए लोगों का कहना है कि बरातियों की बस चलने से पहले यह तीनों युवक बाइक पर सवार होकर चले थे और कह रहे थे कि जब तक बरात पहुंचेगी उससे पहले पहुंच जाएंगे। बरात तो लौट आई, लेकिन बाइक सवार तीनों युवक नहीं पहुंचे। लोगों में इनके न आने की चर्चा चल ही रही थी इसी दौरान हादसे में जान जाने की सूचना पुलिस के द्वारा फोन पर मिली।
विशाल के भाई आकाश ने लक्की और मुकेश के घर जाकर बताया कि हादसा हो गया है और उसके भाई विशाल की मौत हो गई है। लक्की और विशाल भी नहीं बचे। नींद की झपकी ले चुके परिजनों में चीखपुकार मच गई और हादसे की सही जानकारी लेने के लिए कुछ लोगों ने वह नंबर लगा दिया जिससे हादसे की सूचना मिली थी। नंबर किसी पुलिस कर्मी का था और उन्होंने बताया कि तीनों की मौत हो गई है और मुरादाबाद के जिला अस्पताल आ जाएं। परिजन जिस हाल में थे और जो वाहन मिला उस में सवार होकर रोते बिलखते चले गए। बरात आने के बाद जो खुशी का माहौल था वह गम में तब्दील हो गया।
खुशियों के साथ घर से विदा हुए थे, लौटे तो हर आंख हुई नम
संभल। गुरुवार की शाम कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आलम सराय मंडी निवासी लक्की, विशाल और मुकेश के शव घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। सैकड़ों की संख्या में लोग शव देखने के लिए एकत्र हो गए। एक ही मोहल्ले के तीन युवकों की जान जाने की सूचना जिसे हुई वह अफसोस जाहिर करता नजर आया। परिजनों का बिलखना देखकर हर आंख नम होती नजर आई। जिस मोहल्ले में बुधवार की शाम बरात जाने के दौरान खुशियों का माहौल था। उसी मोहल्ले में तीन शव एक साथ आने पर गम का माहौल नजर आया।
पापा सोना मत, मैं चल दिया हूं गेट खुला रखना
संभल। विशाल ने अपने पिता राधेश्याम को बुधवार-गुरुवार की मध्यरात्रि करीब एक बजे फोन कर कहा था कि वह बरात से चल दिया है और पापा आप सोना मत कभी गेट बंद कर दो। पीड़ित ने बताया कि वह तो अपने बेटे का आने का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान करीब सवा दो बजे हादसे में जान जाने की सूचना विशाल के बड़े भाई आकाश के फोन पर पुलिस ने दी। पीड़ित ने बताया कि उनका बेटा विशाल इस समय जींस की सिलाई सीख रहा था। चार भाई और तीन बहनों में पांचवें नंबर का विशाल परिवार का लाडला था।
मुकेश से चाबी छीनी और बरातियों ने बस में बैठने के लिए कहा, पर नहीं माने तीनों दोस्त
संभल। मुकेश, विशाल और लक्की जब बरात में जाने के लिए बाइक से निकले तो कुछ बरातियों ने कहा कि वह तीनों सर्दी में बाइक से न जाएं। बस में बैठें और बाइक को खड़ा कर दें। इन तीनों के अन्य दोस्तों ने बाइक की चाबी तक छीन ली, लेकिन मुकेश ने दूसरी चाबी घर से लाकर बाइक स्टार्ट कर ली और तीनों दोस्त हंसते हुए चले गए। तीनों की मौत के बाद हर किसी की जबान पर यही बात सुनाई दी कि काश दूसरी चाबी न होती और बरातियों की बात मान गए होते तीनों दोस्तों की जान न जाती।
लक्की चलाता था ई-रिक्शा और मुकेश अपने पिता की चाय की दुकान पर बैठता था
संभल। मजदूर पेशा परिवार से ताल्लुक रखने वाले इन तीनों युवकों की शादी नहीं हुई थी। एक मोहल्ले में रहने के साथ ही एक ही जाति के थे। दोस्ती पुरानी थी तो अक्सर एक साथ आया जाया करते थे। लक्की अपने पिता का सहयोग करते हुए ई-रिक्शा चलाता था। मुकेश के पिता हीरालाल नगर में बढ़िया चाय बनाने के लिए मशहूर हैं। भगत जी चाय वालों के नाम से उनकी दुकान यशोदा चौराहे पर है। मुकेश अपने पिता की दुकान पर ही उनका सहयोग करता था।