जुनावई (संभल)। लावर गांव में चाचा प्रताप के साथ रहने की कीमत भतीजे उमेश को जान देकर चुकानी पड़ी। प्रताप से रंजिश माने वाले गांव के ही विजयपाल व उसके परिवार के लोगों ने उमेश की भी हत्या कर दी। आरोपियाें ने उसे मारने से पहले जगाया था। मृतक उमेश के चचेरे भाई विजेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी गोली मारने के बाद तमंचे से फायर करते हुए फरार हो गए थे।
घायल उमेश को उपचार के लिए सीएचसी ले जाया गया था। उसने रास्ते में बताया था कि आरोपियों ने उसे सोते समय जगाया था। आरोपियों ने पहली गोली उसके दायें हाथ में मारी। उसकी चीख निकल गई। उमेश ने घायल अवस्था में बताया था कि उसने आरोपियों से पूछा, मुझे क्यों मार रहे हो, आरोपी बोले, तू ही पूरे फसाद की जड़ है और हाथ व पेट में गोली मार दी। पड़ोस में रहने वाले ग्रामीण हप्पू सिंह ने बताया कि उमेश को पहली गोली चलने के बाद उसकी आंख खुल गई थी। उसे उमेश की आवाज सुनवाई दी। बोल रहा था कि मुझे क्यों मार रहे हो, मेरा क्या कसूर है। इसके बाद और भी गोली चलने की आवाज आई।
एक आरोपी मार रहा था गोली, अन्य तमंचे में कारतूस भरकर दे रहे थे
मृतक प्रताप के भाई क्रांति ने बताया कि एक ही आरोपी गोली मार रहा था। उसके साथ अन्य लोग तमंचे में कारतूस भरकर उसे दे रहे थे।
डीआईजी पहुंचे गांव, घटना की ली जानकारी
गांव लावर में दोहरे हत्याकांड के बाद सोमवार की दोपहर के बाद डीआईजी मुनिराज जी, एसपी कुलदीप सिंह गुनावत गांव पहुंचे और घटना की जानकारी ली। मृतकों के परिजनों को सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। एसपी से मामले में आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के आदेश दिए।क्रांति ने भागकर बचाई जान
गांव लावर में प्रताप सिंह पशुशाला के परिसर में तो उनका छोटा भाई क्रांति बरामदे में सो रहे थे। क्रांति ने बताया कि गोली चलने की आवाज आते ही उनकी आंख खुल गई। देखा तो बड़े भाई प्रताप की चारपाई के पास कुछ लोग खड़े थे। एक गोली मार रहा था और अन्य लोग तमंचे में गोली भर कर दे थे। वह वहां से जान बचाकर दीवार के सहारे घर की ओर भागे। बाहर जाकर शोर मचाया। इससे उनकी जान बच सकी। नहीं तो आरोपी उन्हें भी मार देते।
आरोपी विजयपाल व उसका भाई रहते हैं अपनी ससुराल में
मृतक के भाई क्रांति ने बताया कि आरोपी विजयपाल, उसका भाई जयनारायण थाना बहजोई क्षेत्र के गांव हींसखेड़ा के रहने वाले थे। गांव लावर में विजयपाल की ससुराल है। ससुराल में पत्नी का कोई भाई न होने पर विजयपाल व उसका भाई अपना गांव छोड़कर लावर में आकर रहने लगे थे।