संभल। जिले में बुखार का प्रकोप है और इसकी जद में बच्चे भी आ रहे हैं। वहीं हैरत की बात है कि जिला अस्पताल में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जबकि स्वास्थ्य विभाग बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करता रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि विभाग के दावे सिर्फ हवा हवाई हैं। बच्चों में बढ़ते बुखार के प्रकोप के समय जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता है। जहां एक ओर कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर संभावित है तो वहीं अब बुखार का प्रकोप है। कई जिलों में बुखार बच्चों की जान ले चुका है। ऐसे में संभल जिले में तैयारी नहीं होना बड़ा सवाल है।
सीएमओ का कहना है कि वह लगातार शासन स्तर पर पत्राचार कर चुके हैं और अब तक चिकित्सक की तैनाती जिले में नहीं की गई। शासन की अनदेखी कहें या जिला स्वास्थ्य विभाग की कमजोर पैरवी। दोनों ही स्थिति में आम जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। और भविष्य में हालात खराब होने का अंदेशा है।
सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 25 बच्चे ऐसे पहुंचे जिन्हें बुखार था। इन सभी की उम्र पांच से दस वर्ष के बीच थी। परिजन दवाई दिलाकर लौट गए। बच्चों के लिए विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है तो सामान्य तौर पर ओपीडी देखने वाले चिकित्सक ही उपचार देते हैं। यदि निजी अस्पताल व क्लीनिक का आंकड़ा देखा जाए तो इस समय बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। एक दिन में 25 बच्चे बुखार से पीड़ित जब जिला अस्पताल की ओपीडी पहुंचे हैं तो अन्य सीएचसी पर भी संख्या अधिक होगी।
जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट अधूरी
जिला अस्पताल में दस बेड की पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट बनाई गई है जो अब तक अधूरी है। बुखार का प्रकोप है और यदि किसी बच्चे को भर्ती करना पड़ गया तो क्या होगा। जिम्मेदार तो पूरी तैयारी होने की बात कह रहे हैं लेकिन अब तक यूनिट अधूरी क्यों है यह बड़ा सवाल है। नोडल अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी का कहना है कि जिला अस्पताल, नरौली और चंदौसी सीएचसी में बच्चों के भर्ती के लिए बेड की व्यवस्था की गई है। असमोली में भी जल्दी व्यवस्था कर ली जाएगी। कुछ ही कमी रह गई है जिसको जल्दी पूरा कर लिया जाएगा। यदि बच्चों को भर्ती करने की जरूरत होगी तो भर्ती किया जाएगा। मंगलवार तक जिला अस्पताल में जनरेटर लगाकर यूनिट पूरी तरह तैयार कर ली जाएगी।