चंदौसी। शासन प्रशासन के काफी तैयारियों और प्रयासों के बाद भी गेहूं खरीद की रफ्तार में तेजी नहीं आयी है। अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 21 प्रतिशत खरीद हुई है। बाजार में गेहूं का भाव सरकारी समर्थन मूल्य के लगभग बराबर रहने से क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। वहीं आढ़तियों को गेहूं बेचने के लिए भीड़ लगी है। हालांकि उन्हें वहां नुकसान पहुंच रहा है।
जिले में गेहूं खरीद शुरू होने के 76 दिन बाद भी लगभग 21 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। किसानों को गेहूं का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन से गेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। इसके लिए 82 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इस बार एक मार्च से गेहूं खरीद शुरू की गई। गेहूं खरीद शुरू होने के 76 दिन बाद भी लक्ष्य 1.27 लाख एमटी की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। 15 मई तक कुल 27146.53 एमटी गेहूं खरीदा गया है। यह खरीद 3441 किसानों से हुई है, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए 4907 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
प्रशासन की तरफ से लक्ष्य को हासिल करने के लिए अवकाश के दिनों में क्रय केंद्र खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार 100 क्विंटल से अधिक की खरीद पर होने वाले सत्यापन प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है। साथ ही बटाईदार को भी इस बार गेहूं बेचने की छूट दी गई है। इसके बाद भी गेहूं खरीद की गति तेज नहीं हो पा रही है। जबकि क्रय इंचार्ज किसानों से घर घर संपर्क कर सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए अपील कर रहे हैं।
किसान समर्थन मूल्य योजना के तहत 2,275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं क्रय केंद्रों पर न बेच कर आढ़तियों व बिचौलियों को बेच रहे हैं। जबकि क्रय केंद्रों पर गेहूं ले जाने वाले किसानों को उनके खाते में 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उतरवाई व छनाई भी दी जा रही है। ऐसे में यहां गेहूं 2,295 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है। इसके विपरीत बिचौलिए 2,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रहे हैं। जबकि आढ़ती 2,200 रुपये देने को भी तैयार नहीं हैं। इसके बाद भी किसान आढ़तियों पर विश्वास जता रहे हैं।