तेंदुआ जाल में फंसा...और वो शेर हो गए
हयातनगर क्षेत्र के गांव धतरा में तेंदुए को देखे जाने से लेकर जाल में फंसाने तक का घटनाक्रम लगभग साढ़े छह घंटे चला। इस दौरान न तेंदुए ने इंसानों को नुकसान पहुंचाया और न ही ग्रामीणों के बीच से उस पर हमले की कोई कोशिश हुई। हुआ उल्टा, जो टीम रेस्क्यू के लिए आई वो खुद पर काबू नहीं रख सकी। जाल में तेंदुए के कैद होते ही वन और पुलिसकर्मियों ने वो किया जो जंगल में भी नहीं होता। तीन चारपाइयां उल्टी करके बिछा दीं। उनके ऊपर खड़े होकर जाल में घिरे तेंदुए को करीब 45 मिनट बुरी तरह कुचला गया।
ग्रामीणों ने बताया कि जाल में बंद होने के बाद भी तेंदुए के गुर्राने और तेवर दिखाने पर किसी ने सुझाव दिया कि उसे बेहोश कर दिया जाए। इस सुझाव पर वन विभाग के विशेषज्ञ या पशु चिकित्सक नहीं बुलाए गए बल्कि रेस्क्यू टीम ने एक ग्रामीण से भैंस को बेहोश करने वाला इंजेक्शन लाकर लगाने के लिए कह दिया। इस बीच तेंदुए को काबू करने के लिए उसके जाल पर चारपाइयों का जाल बिछाकर दबाव बनाया जाने लगा।
इस पर भी बात नहीं बनी तो बिछी चारपाइयों पर चढ़कर तेंदुए को पैरों से दबाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 45 मिनट तक तेंदुए के साथ इसी तरह की बेरहमी की गई। इस दृश्य की एक वीडियो भी वायरल हो रही है। इसके बाद तेंदुए की छटपटाहट थम गई तो उसे बेहोश बताकर मुरादाबाद ले जाया गया। कहा गया कि उपचार के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा लेकिन मुरादाबाद में उसके मरने की जानकारी दी गई। कहा गया कि सदमे से वह रास्ते में मर गया।
यूं चला घटनाक्रम
- धतरा निवासी वसंत ने बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे खेत पर तेंदुआ देखा
- दौड़ाने पर सुबह आठ बजे तेंदुआ रामकुंवर सैनी के शौचालय में घुस गया।
- 09 बजे पुलिस और 9.30 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
- 11.30 बजे जाल लगाकर तेंदुए को पकड़ लेने में कामयाबी मिल गई।
- रात में अचानक तेंदुए के मरने की जानकारी दी गई।
घर में ही कैद रहे रामकुंवर के परिजन
तेंदुए के घुसने के समय किसान रामकुंवर सैनी की पत्नी सुशीला देवी, बेटी ज्ञानवती, पुत्रवधू रेखा भाग पड़ीं। बेटी और पुत्रवधू ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। सुशीला देवी छत की ओर भागीं। तीन घंटे से ज्यादा समय कमरे में कैद रहीं ननद-भाभी को कमरे में मौजूद हल्की जाली भी डरा रही थी।
बताया कि लग रहा था कि जाली तोड़कर तेंदुआ भीतर न आ जाए। बाहर भीड़ के बीच से आ रहीं आवाजों से पता नहीं चल रहा था कि बाहर की स्थिति क्या है। जब तेंदुआ जाल में फंस जाने की बात बाहर से बताई गई तभी दरवाजा खोलकर दोनों कमरे से निकलीं।
मेरे पैर का पिछला हिस्सा तेंदुए ने मुंह में भर लिया था। काफी जख्म हो गया है। टांके लगे हैं। चिकित्सक ने एक सप्ताह का आराम बताया है। जूता होने के कारण पैर काफी हद तक सुरक्षित रहा है।
- अनुज चौधरी, सीओ, संभल