चंदौसी। महापुरुष स्मारक समिति एवं सर्वसमाज जागरूकता अभियान के संयुक्त तत्वावधान में क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती विनायक कालोनी में श्रद्धाभाव से मनाई गई। दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने उनके चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्र ने कहा कि बड़े भाई परमानंद को ब्रिटिश शासन द्वारा फांसी देने पर बिस्मिल ने 11 वर्ष की अवस्था में ब्रिटिश शासन को समाप्त कर देश को आजाद कराने का संकल्प ले लिया। इसके लिए पहले हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया। उनके संपर्क में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, राजगुरु, सुखदेव जैसे क्रांतिकारी आए। उन्होंने सात अगस्त 1925 में शाहजहांपुर में इमरजेंसी बैठक बुलाई, जिसमें ब्रिटिश शासन से निबटने को काकोरी स्टेशन पर खजाने से भरी ट्रेन को लूटने की योजना बनी। क्रांतिकारियों ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में नौ अगस्त 1925 को काकोरी कांड कर ट्रेन से खजाना लूटकर फरार हो गए। इसके बाद बिस्मिल, अशफाक, ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी को काकोरी कांड में फांसी की सजा सुनाई गई। उन्हें 19 दिसंबर 1927 को सुबह छह बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर जेल में फांसी दी गई। फांसी के तख्ते पर जाते समय उन्होंने अपनी लिखी लाइन पड़ी- सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है। इस अवसर पर सृष्टि सिंह, बृजेंद्र प्रसाद तिवारी, रश्मि शर्मा, सत्यप्रिया मिश्रा, डा. शिवांगी मिश्रा, किशन सिंह, राम सिंह, हर्ष तिवारी, उत्कर्ष तिवारी, गोपी सिंह, पवन सिंह आदि मौजूद रहे।