समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव एक बार फिर यूपी के संभल से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। उनके करीबी और राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां और संभल के विधायक तथा यूपी सरकार के पूर्व कबीना मंत्री से नवाब इकबाल महमूद ने इस संबंध में रामगोपाल यादव से आग्रह किया है। आपसी बातचीत में प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
इस मुलाकात के बाद सियासी हलकों में इसकी चर्चा हो रही है। वहीं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से टिकट के दावेदार बन रहे कुछ नेताओं में खलबली सी मच गई है। भविष्य की सियासत को लेकर उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। यह बात दीगर है कि वे इस संबंध में कुछ कहने को राजी नहीं है क्योंकि मामला पार्टी के बड़े सियासी दिग्गज की दावेदारी का है।
राज्यसभा के सदस्य प्रोफेसर रामगोपाल यादव का संभल के साथ सियासी रिश्ता तब बना जब मुलायम सिंह यादव संभल की सरजमीं से चुनाव मैदान में उतरे। रामगोपाल यादव उनके मुख्य निर्वाचन अभिकर्ता बने। चुनावी महासमर में रामगोपाल ने बड़ी महारत दिखाते हुए 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव को कामयाब बनाया। वर्ष 2003 में जब मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो 2004 में रामगोपाल यादव पहली बार संभल संसदीय क्षेत्र के लोकसभा उम्मीदवार बने और यहां से सांसद चुने गए। वह 2009 तक संभल के सांसद रहे।
लोकसभा सदस्य रहते हुए रामगोपाल यादव नवंबर 2008 को राज्यसभा के लिए चुन लिए गए। लेकिन लोकसभा के कार्यकाल को छह महीने से कम थे। इसलिए तब उप चुनाव नहीं हुआ। राज्यसभा सदस्य रहते हुए रामगोपाल यादव ने विकास कार्य को रफ्तार दिया। संभल के विकास को उनके लोकसभा और राज्यसभा के कार्यकालों में पंख लगे।
बड़ा फायदा यूपी में सपा सरकार होने का भी मिला। संभल जिले में चौड़ी सड़कें बनीं। हयातनगर में राजकीय डिग्री कालेज और संभल में जिला अस्पताल की सौगात मिली। रिठाली में आईटीआई खुला। उनके योगदान को देखते हुए संभल के तमाम नेता व दिग्गज उनसे अब संभल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। संभल संसदीय क्षेत्र अब चंदौसी, बिलारी कुंदरकी, संभल, असमोली विधान सभा क्षेत्र हैं जबकि पहले संभल संसदीय क्षेत्र में गुन्नौर, गंगेश्वरी, संभल, बहजोई, बिसौली थे।
राजनीति के लिए नया घरौंदा तलाश रहे हैं चरन सिंह भारती
संभल। बसपा से निष्कासित चरन सिंह भारती ने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ मोर्चा को दिया। धरना प्रदर्शन और सभा के बाद अब वह अपने समर्थकों को लामबंद कर नई राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही वह किसी दल में शामिल हो जाएंगे। सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां से उनकी बातचीत हुई है। वहीं चरन सिंह भारती का कहना है कि उन्होंने अभी किसी दल में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया है। वह इस संबंध में अपने समर्थकों से विचार विमर्श करेंगे। इसके लिए जल्द ही एक सम्मेलन बुलाएंगे। सम्मेलन में समर्थकों की जो राय आएगी उसके हिसाब से नई पारी का निर्णय लिया जाएगा।