चंदौसी। अब खेतों में पराली की खाद बनाने के लिए कृषि विभाग किसानों को निशुल्क बायो डीकंपोजर देगा। 20 अक्तूबर तक विभाग को 4800 वॉयल (शीशी) मिल जाएगी। पराली को खाद बनाने के लिए डीकंपोजर का छिड़काव करना होगा। जिसके बाद 15 दिन में पराली गलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने में लगा है।
संभल जनपद में करीब 44 हजार हेक्टेअर में धान की फसल होती है। धान की कटाई के बाद खेत में पराली या ठूंठ (फसल अवशेष) रह जाती है। किसान इस ठूंठ अथवा पराली के ढेर में आग लगा देते हैं। जिससे वायु प्रदूषण होता है। गत वर्ष संभल जनपद में पराली व अन्य वेस्टेज जलाने के 12 मामले पकड़ में आए थे। इस बार कृषि विभाग पराली को खेत में गलाने के लिए किसानों को बायो डीकंपोजर निशुल्क दे रहा है। एक शीशी में 100 एमएल की मात्र होगी। किसान को उसकी धान की फसल के अनुपात में शीशी उपलब्ध कराई जाएगी। डीकंपोजर से किसानों को स्वयं इसका घोल तैयार कर छिड़काव करना होगा। जिसके 15 दिन बाद पराली गलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए एक एकड़ भूमि में 200 लीटर घोल की आवश्यकता होगी।
बायो डीकंपोजर से कल्चर (घोल) बनाने में लगते हैं सात दिन
कृषि विभाग से मिलने वाले बायो डीकंपोजर से किसानों को स्वयं ही घोल बनाना होगा। इसके लिए एक एकड़ भूमि की पराली के लिए 200 लीटर पानी एक ड्रम अथवा टंकी में भरना होगा। बाद में दो किलोग्राम गुड अच्छे से मिलाना होगा। इसके बाद बायो डीकंपोजर की बोलत में उपलब्ध दवाई को ड्रम में घोल दें। दवाई अथवा ड्रम के घोल को हाथ से नहीं छूना है। इस घोल को सात दिन तक सुबह शाम रोज डंडे से हिलाते रहे। इस तरह घोल (कल्चर) तैयार हो जाएगा। इसके बाद स्प्रे मशीन से खेत में फसल अवशेषों पर इसका छिड़काव कर दें। आवश्यकता पड़ने पर बीच-बीच में दोबारा छिड़काव कर सकते हैं। ताकि 60 फीसदी नमी बनी रही। दोबारा छिड़काव के लिए किसानों को डीकंपोजर की शीशी लेने की आवश्यकता नहीं है। 200 लीटर पानी का ड्रम तैयार कर गुड़ मिलाएं और उसमें पहले बचे हुए कल्चर (घोल) में से तीन लीटर घोल ड्रम में मिल दें और सात दिन तक डंडे से हिलाते रहे। इसके बाद घोल तैयार है।
शासन के निर्देश पर कृषि विभाग बायो डीकंपोजर खरीद रहा है। संभल जनपद को 20 अक्तूबर तक बायो डीकंपोजर मिल जाएगा। यह किसानों को निशुल्क दिया जाएगा। किसानों से खेतों में पराली न जलाने का आह्वान किया जा रहा है। इससे किसानों को लाभ होगा।
ओंकार सिंह, जिला कृषि अधिकारी संभल