बहजोई। बीते तीन साल से कलक्ट्रेट परिसर में करीब 35 लाख रुपये की लागत से बनी पशुपालन विभाग की रोग निदान प्रयोगशाला अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। इससे पशुओं की रक्त समेत दूसरी जांचों के लिए पशुपालकों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। यह हाल तब है जब जिले में टैगिंग वाले करीब आठ लाख पशु विभाग की पंजिका में दर्ज हैं।
वित्तीय वर्ष 2017 में कलक्ट्रेट परिसर में पशुओं की रक्त समेत दूसरी जांचों के लिए 34 लाख 18 हजार रुपये की लागत से रोग निदान प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। इसमें शासन की मंशा थी कि जिले के पशुओं की रक्त समेत गोबर, मूत्र व पेट के कीड़े आदि की जांच रोग निदान प्रयोगशाला में आसानी से हो सके और पशुपालकों को महंगे इलाज से छुटकारा मिल जाए।
इसके बावजूद अधिकारी शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। बीते तीन साल से रोग निदान प्रयोगशाला शुरू नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि कलक्ट्रेट परिसर में हर माह विकास कार्यों से संबंधित बैठक होती है और इसमें जिला प्रशासन समेत विभिन्न विभागों के अफसर भी शामिल रहते हैं। लेकिन अभी तक रोग निदान प्रयोगशाला को शुरू कराने को लेकर किसी भी स्तर से गंभीरता नहीं दिखाई गई है। यह बात दीगर है कि रोग निदान प्रयोगशाला में पशुओं की जांच को लेकर कुछ केमिकल आदि जरूर मिल चुके हैं।
पद भी नहीं हुए सृजित : रोग निदान प्रयोगशाला को सुचारू रूप से संचालित कराने समेत पशुओं की रक्त व दूसरी जांचों के लिए प्रयोगशाला अधीक्षक समेत एक प्रयोगशाला सहायक व दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत होती है। इसके बावजूद तीन साल बीतने पर भी सभी पद सृजित नहीं हो सके हैं।
सीवीओ का दफ्तर संचालित है प्रयोगशाला के भवन में : कलक्ट्रेट परिसर में बने रोग निदान प्रयोगशाला के भवन में वर्तमान में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का दफ्तर संचालित है। इसमें एक भाग में सीवीओ तथा दूसरे भाग में लिपिक संवर्ग का काम-काज संचालित होता है।
रोग निदान प्रयोगशाला के लिए विभागीय मुख्यालय के लिए पत्र व्यवहार किया जाता रहा है। प्रयासरत हैं कि जल्द ही रोग निदान प्रयोगशाला के लिए पद सृजित हो सकें और पशुओं की जांच भी शुरू हो सके।
-मुन्नालाल यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला संभल।