मैंथा की नई प्रजाति सिमक्रांति के नतीजे सामने आने लगे हैं। खेतों में सिमक्रांति लहलहा रही। कटाई भी शुरू हो चुकी है। तेल की रिकवरी देखने के बाद किसान उत्साहित हैं। आमतौर पर किसान, मैंथा की शिवालिक प्रजाति को पैदा करते रहे हैं।
वर्ष 2016 में पहली बार प्रयोग के तौर पर संभल, बाराबंकी, रामपुर, बदायूं, उरई, जालौन, कोंच समेत कई जनपदों में सिमक्रांति की पैदावार की गई। इसकी बुआई फरवरी में हुई। फसल अप्रैल में तैयार हुई। अब कटाई का मौका है।
सिमक्रांति की पहली कटाई शहबाजपुर गांव में हुई है। तेल की रिकवरी का औसत 14 किलोग्राम प्रति बीघा आई है। दूसरी कटाई में भी इतना ही तेल निकल सकता है। सीमैप लखनऊ के कृषि वैज्ञानिक डा. सौदान सिंह के मुताबिक सबसे अहम बात खेती करने के तरीके में है।
क्यारी बनाकर बुआई करने की वजह से पानी कम लगा और पैदावार अधिक हुई। मैंथा की दोनों कटिंग में तेल की रिकवरी का औसत 20 किलोग्राम प्रति बीघा तक रहने के आसार हैं। लेकिन जहां फसल अच्छी है वहां पर तेल की रिकवरी और अच्छी हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि संभल जिले में सिमक्रांति की फसल बेहद अच्छी है। गांव भटौला में किसान सर्वेश सैनी के तीन खेतों में करीब 150 बीघा सिमक्रांति लगाई गई अब फसल तैयार है। उनकी तेल रिकवरी 20-25 किलोग्राम प्रति बीघा होने के आसार हैं।
मैंथा सिमक्रांति को ठीक उसी तरह से मेड़ (क्यारी) बनाकर पैदा करना है, जैसे आलू को पैदा करते हैं। क्यारी बनाकर पैदा करने से पानी भी कम लगेगा। बिना क्यारी के जो फसल पैदा करते हैं उसमें 14 बार पानी लगाना पड़ता है लेकिन क्यारी बनाकर पैदा करने से सात बार पानी लगाना पड़ेगा।