संभल। पवांसा के किसान पंजीकरण नहीं होने की वजह से अपना धान सरकार द्वारा निर्धारित दर पर बेच नहीं पा रहे हैं। पंजीकरण कराने को लेकर क्षेत्र के किसान अफसरों की चौखट पर चक्कर लगाने को विवश हैं।
दरअसल, पवांसा गांव में तीन साल पहले चकबंदी हुई थी। चकबंदी के बाद किसानों का डाटा कंप्यूटर में नए सिरे से फीड किया गया, लेकिन इसमें कुछ टेक्निकल दिक्कत है, जो अभी तक बनी हुई है। इसी दिक्कत के चलते ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किसान नहीं कर पा रहे हैं, जिससे किसान परेशान हैं। वहीं, सरकारी खरीद की स्थिति यह है कि सिहोरी के किसान रिंकू शर्मा ने 18 सितंबर को जैसे तैसे करके अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया था लेकिन अब तक धान की तौल कराने के लिए टोकन नहीं मिल सका। यही हाल शेरपुर के किसान योगेंद्र सिंह का है। उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन नौ सितंबर को कराया था। कुदरत की मार के बीच सिस्टम की मार ने किसानों को बेहाल करके रख दिया है। कोई सुनने को तैयार नहीं है।
जिन किसानों को धान ब्रिकी के लिए टोकन नहीं मिल पा रहा है, वे ऑनलाइन ही अपने नजदीकी वाले दूसरे क्रय केंद्र को सलेक्ट करके टोकन ले सकते हैं। यदि नजदीकी क्रय केंद्र से भी नहीं मिल पा रहा है तो फिर पूरे जिले में किसी भी क्रय केंद्र को सलेक्ट कर टोकन ले सकते हैं। रजिस्ट्रेशन न हो पाने में दिक्कत सर्वर की है। सर्वर के डाउन चलने से कहीं-कहीं दिक्कत आ रही है।
विजेयता सिंह, डिप्टी आरएमओ, संभल।