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पर्यूषण पर्व के आठवें दिन की उत्तम त्याग धर्म की पूजा

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चिलकाना रोड़ स्थित जैन मन्दिर में पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग - फोटो : SAHARANPUR
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सरसावा/चिलकाना/नकुड़ (सहारनपुर)। जैन समाज द्वारा पर्यूषण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। जैन विद्वानों ने कहा कि त्याग का अर्थ केवल दान करने से नहीं है दान और त्याग में बहुत बड़ा अंतर है।
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सरसावा के सराफा बाजार स्थित पंचायती जैन मंदिर में नित्य नियम पूजा प्रक्षाल अभिषेक के उपरांत उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। जैन विद्वानों ने कहा कि त्याग और दान दोनों बिल्कुल अलग होते हैं। दान कर्म है दान करने से पुण्य का बंध होता है और दानी दान की गई वस्तु राशि आदि के पुन: प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहता है। वहीं, त्याग कर्म नहीं धर्म है। त्याग के उपरांत उस वस्तु राशि अथवा किसी और के प्रति आसक्ति नहीं होती है। त्याग का अर्थ है कि आप माया मोह लोभ कषाय अहंकार आदि का त्याग कर जीवन को मोक्ष पथगामी बनाने का प्रयत्न करें। रात्रि में मंदिर जी में आरती तथा अन्य कार्यक्रम हुए।
चिलकाना सुल्तानपुर के जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन पंडित साकेत जैन शास्त्री ने कहा कि त्याग ऐसा धर्म है, जिसे प्राप्त कर आत्मा अकिंचन यानि अकिन्चन्य धर्म की धारी बन जाती है। पूर्ण ब्रह्म में लीन होने लगती है और सारभूत आत्मस्वभाव को प्राप्त कर लेती है। पूजा-अर्चना तथा श्रीजी के अभिषेक में संरक्षक सुधीर जैन, अध्यक्ष वीरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष बिजेंद्र जैन, महामंत्री निशांक जैन, श्रीयांश जैन, मोहित जैन, पारुल, पूजा, दीपांशी, ममता, दिव्य, विजया, सुनीता, तनुजा जैन रहे।
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नकुड़ के भगवान श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर व चंद्रप्रभु चैतालय में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की पूजा के साथ भगवान पुष्पदंत जी को अर्घ्य समर्पित किए। जैन मिलन के अध्यक्ष मुकेश जैन, पंकज जैन, जैन समाज के अध्यक्ष संदीप जैन, राजेश जैन, राजेश, संयम जैन, वर्धन, संजीव जैन, वर्षा, सरिता, राखी, नीतू, प्रतिभा, बीना रहे।
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