मोहतमिम कार्यालय से जारी अपील
मोहतमिम कार्यालय से जारी हुई अपील में कहा गया है कि नई लाइब्रेरी में उर्दू, हिंदी, अरबी, फारसी, अरबी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं की किताबों के अलावा धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध होंगी। लाइब्रेरी के प्रत्येक हाल में दीनी, समाजी, सियासी समेत सभी विषयों की पुस्तकें रखी जाएंगी। दारुल उलूम ने प्रकाशकों और लेखन क्षेत्र से जुड़े से लोगों से किसी भी विषय पर लिखी गई किताबें, धार्मिक पुस्तकें, ऐतिहासिक पत्र या अन्य लेखन सामग्री से लाइब्रेरी का सहयोग करने की अपील की है।
पुरानी लाइब्रेरी में रखा है ऐतिहासिक पुस्तकों का जखीरा
पुरानी लाइब्रेरी में बेशकीमती पुस्तकों का जखीरा मौजूद है। लाइब्रेरी में जहां सभी धर्मों के ग्रंथ मिलते हैं। वहीं, राजा महाराजाओं की हस्तलिखित किताबें व लेख भी बेहद संभाल कर रखे गए हैं। लाइब्रेरी में ऋगवेद, सामवेद, यर्जुवेद, अथर्ववेद के साथ ही गीता, महाभारत, रामायण, बाइबल, हस्तलिखित कुरआन, तोरेत, सोने से लिखा कुरआन पाक, एक पेज पर आधारित कुरआन, मुगल शासक हजरत औरंगजेब का हस्तलिखित कुरआन पाक, हजरत मोहम्मद साहब द्वारा मिस्र के बादशाह को लिखा गया पत्र, सबसे छोटा कुरआन और अकाबिरों द्वारा लिखित पुस्तकें मौजूद हैं। इनके अलावा यहां लाखों पुस्तकें रखी गई हैं। जिनका छात्र अध्ययन करते हैं।
17 भाषाओं में रखी हैं पुस्तकें
पुस्तकालय में 17 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध है। इनमें अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, पंजाबी, तेलगू, तमिल, फ्रांसीसी, बंगला, तुर्की, मलयालम, मराठी, सिंधी और बरमी भाषाएं शामिल है।
शोध करने पहुंचते हैं
इस पुस्तकालय के महत्व का अंदाजा यूं भी लगाया जा सकता है कि अरब देशों, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित विश्वभर के शोधकर्ता इस्लाम धर्म के विषयों पर शोध करने के लिए समय-समय पर पुस्तकालय से अवश्य संपर्क करते हैं। देश के कोने-कोने से भी शोध करने वालों का तांता यहां लगा रहता है।
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