संदीप ने बताया कि नितिन ने उन्हें बताया है कि वह इन दवाओं को उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में सप्लाई कर रहा था। उक्त प्रकरण में एसटीएफ उत्तराखंड की ओर से फैक्टरी संचालक नितिन कुमार, परिसर मालिक राजेंद्र सिंह, अश्वनी, विशाल, पंकज, अजय रुड़की के विरुद्घ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। जांच में औषधि के नमूने अधोमानक पाए जाने के बाद विवेचना पूर्ण कर औषधि अधिनियम 1940 के तहत न्यायालय में परिवाद दायर किया जाएगा।
कई राज्यों में सप्लाई हो रही थीं दवाएं
एसटीएफ और औषधि विभाग के अधिकारियों द्वारा पूछताछ में नितिन ने दवाएं उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में सप्लाई करने की बात कबूल की है, जबकि चर्चा है कि दवाएं उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी। उत्तराखंड में दवाएं जा रही थी, तभी तो वहां की टीम आई।
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क्या कर रहा था औषधि विभाग
कैलाशपुर के औद्योगिक क्षेत्र में नकली और अधोमानक दवाएं बनाने की अवैध फैक्टरी दस माह से चल रही थी, लेकिन औषधि विभाग को इसकी कानो कान खबर तक नहीं लगी। खास बात यह है कि यदि एसटीएफ उत्तराखंड की टीम को पता ना चलता तो नकली दवाएं बनाने का काम पता नहीं कब तक चलता रहता। ऐसे में औषधि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।