सहारनपुर के खुडाना गांव के श्मशान घाट में सचिन और सलोनी के शव पेड़ पर लटके मिले। इसे पुलिस भले ही आत्महत्या मानकर चल रही हो, लेकिन सलोनी के परिजन और घटनास्थल को देखकर हत्या से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
घटनास्थल पर जांच करती पुलिस।
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सलोनी की मां पिंकी ने आरोप लगाया कि मंगलवार शाम करीब चार बजे वह घर पर नहीं थी। इसी दौरान सचिन बाइक पर आया और जबरदस्ती सलोनी का अपहरण कर वहां से ले गया। पड़ोसियों से जब इसके बारे में पता चला कि वह बड़गांव थाने भी पहुंचे थे। पिंकी ने बताया कि थाने में उन्होंने पुलिस को पूरी जानकारी दी थी कि उसकी बेटी का अपहरण हुआ है और किसने किया है। लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यह कहकर टरका दिया कि रिश्तेदारी का मामला है, बेटी वापस आ जाएगी। यदि पुलिस गंभीरता से लेती तो शायद सलोनी की जान बच सकती थी। पिंकी ने आरोप लगाया कि सलोनी की हत्या की गई है।
दोनों परिवार थे प्रेम-प्रसंग के खिलाफ
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सचिन और सलोनी दूर के रिश्ते में मामा-भांजी लगते थे। दोनों के परिजनों को जब इसके बारे में पता चला कि उन्होंने विरोध भी किया, लेकिन फोन पर दोनों के बीच बातचीत होती रहती थी। इसकी वजह से दोनों परिवारों में भी तनाव की स्थिति थी। सलोनी चार बहनों और एक भाई में तीसरे नंबर की थी। वह कक्षा आठ तक पढ़ी थी। पिता हलवाई का काम करते थे। वहीं सचिन अपने माता-पिता की तीसरे नंबर की संतान था। उसके पिता की दो साल पहले मौत हो गई थी।
ये उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला यह है कि जब सचिन सलोनी को लेकर चार बजे आ गया था तो दोनों रात भर कहां रहे। यदि दोनों घर से निकल ही गए थे तो कहीं दूर भी जा सकते थे। सचिन अपने ही गांव के श्मशान घाट में सलोनी के साथ आत्महत्या क्यों करेगा। दूसरा अहम सवाल यह है कि सलोनी के पैर जमीन पर टिके हुए थे। उनके पास में बाइक खड़ी थी। यदि दोनों ने बाइक पर चढ़कर फंदा लगाया है तो बारिश के कारण श्मशान घाट की जमीन गीली थी, लेकिन फिर भी बाइक नहीं गिरी। तीसरा सवाल यह है कि सचिन ट्रैक्टर से आसपास के गांवों में खेतों की जुताई करता था, लेकिन उसके पास से तीन मोबाइल बरामद हुए हैं। तीन मोबाइल का सचिन क्या करता था।