सरसावा (सहारनपुर)। गन्ने में लगने वाली बीमारियों को लेकर गन्ना विभाग ने किसानों को जागृत करते हुए गन्ने को बीमारी आदि से बचाव के तरीके तथा दवाइयों के विषय में जानकारी दी।
उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त के आदेश पर गठित कीट रोग निगरानी दल ने सरसावा क्षेत्र के आधा दर्जन से भी अधिक गांवों में भ्रमण करते हुए किसानों के गन्ने की फसल को देखा। इस दौरान पादप रोग विज्ञानी डॉ. अवधेश कुमार तथा कीट रोग विज्ञानी डॉ. नीलम कुरील ने किसानों को समझाया कि गन्ने की फसल में कीट रोग फैलाते हैं। विशेषकर गन्ने की फसल चोटी बेधड़क तथा कंडुवा रोग से ग्रसित हो जाती है। इससे बचाव के लिए किसानों को पौधों को जड़ सहित उखाड़ने के तरीके समझाते हुए कुछ दवाओं को पानी के साथ तय मात्रा में सम्मिलित करते हुए ड्रिंचिंग कर हल्की सिंचाई करने के भी सुझाव दिए गए। कृषि विज्ञानियों ने काला चिकटा मिलीबग कीटों से बचाव के तरीके भी समझाते हुए किसानों को बताया कि यदि किसान समय पर अपनी फसल का ध्यान रखें तो उन्हें रोगों से बचाया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि फसल तो सुरक्षित रहेगी ही। भविष्य में भी फसल में ये कीट नहीं पनप पाएगा। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक डॉ. उदय भान राव, ओमवीर सिंह, चीनी मिल के मुख्य लेखाकार सौरव बंसल आदि रहे।