सहारनपुर। तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन, बढ़ता वायु प्रदूषण, मिलावटी खाद्य पदार्थ और फल व सब्जियों के उत्पादन में केमिकलयुक्त कीटनाशक का प्रयोग कैंसर की समस्या बढ़ा रहे हैं। जनपद के सरकारी अस्पतालों में हर वर्ष करीब 150 संदिग्ध मरीज पहुंचते हैं, लेकिन अफसोस की राजकीय मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल तक में कैंसर के इलाज के लिए न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही दवाएं। केवल मरीज की काउंसिलिंग और जांच की जाती है। पुष्टि होने पर मरीज को रेफर कर उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
सहारनपुर जैसे शहरों और देहात क्षेत्रों में कैंसर को लेकर शिक्षा और जागरूकता का अभाव है। यही वजह है कि कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में तंबाकू मुक्त परामर्श केंद्र स्थापित है। बीते कई साल से डॉ. बुशरा अंसारी यहां पहुंचने वाले लोगों की काउंसिलिंग करती हैं और तंबाकू उत्पाद छुड़ाने के लिए जरूरी दवाएं देती हैं, साथ ही वह संदिग्धों को जागरूक भी करती हैं। जिन मरीजों में कैंसर होने का शक रहता है। उनकी जांच भी कराई जाती है, लेकिन जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद विभाग मरीज को रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा लेता है। स्वास्थ्य विभाग के पास इसके अलावा अन्य कोई सुविधा कैंसर मरीजों के लिए नहीं है। डॉ. बुशरा बताती हैं कि उनके पास हर साल करीब 150 मरीज इस तरह के पहुंच रहे हैं, जिनमें कैंसर जैसे लक्षण रहते हैं। वह उनकी काउंसिलिंग करने के साथ ही तंबाकू छुड़ाने के लिए जरूरी दवाएं भी देती हैं।
कैंसर से बचाव के तरीके
- तंबाकू से बने उत्पादों और शराब का सेवन न करें।
- लाल मीट न खाएं और नियमित व्यायाम करें।
- डिब्बों में बंद रेडीमेड खाना न खाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें और सफाई का ध्यान रखें।
जनपद में कैंसर के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक और इलाज की सुविधा नहीं है। यदि कोई मरीज आता है तो फिजिशियन ही उसे देखते हैं। फिजिशियन या काउंसलर की सलाह पर मरीज की जांच कराई जाती है। पुष्टि होने पर मरीज को रेफर किया जाता है।
-- शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी