सहारनपुर। कोरोना से निपटने के लिए सरकार और प्रशासनिक स्तर से किए गए प्रबंध विभाग की लचर व्यवस्था की वजह से फेल साबित हो रहे हैं। अभी तीसरी लहर ने दस्तक ही दी है, जिसमें विभाग शत-प्रतिशत मरीजों को दवा तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। सवाल यह है कि यदि दूसरी लहर की तरह कोरोना गंभीर रूप लेता है तब विभाग क्या करेगा? नियमानुसार किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज के इलाज की जिम्मेदारी विभाग की है। यदि मरीज को भर्ती करने की जरूरत है तो उसे कोविड अस्पताल भेजा जाता है और यदि सामान्य लक्षण हैं तो उसे घर पर ही पांच दिन की दवाओं की कोविड किट दी जानी चाहिए। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि मरीजों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उनको तुरंत दवा उपलब्ध कराई जा रही है। विभागीय दावों की हकीकत जानने के लिए कुछ मरीजों से संपर्क करने का प्रयास किया। अलग-अलग तिथि में संक्रमित मिले दस मरीजों को फोन किए गए, जिनमें से चार मरीजों ने दवा नहीं मिलने की बात कही। पेश है रिपोर्ट...
पहले ही आ चुकी हैं दवाएं
कोरोना के इलाज के लिए जनपद में कई माह पहले दवाएं भेजी जा चुकी हैं। उसके बावजूद मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। जून 2021 में बच्चों के लिए दवाओं की 23,850 किट आई थी, जो निगरानी समितियों को दी गई थी। इसके अलावा नवंबर में बड़ों के लिए 19,080 किट आई हैं। जो 20-20 किट के हिसाब से जनपद में ग्राम स्तर पर बनी 954 निगरानी समितियों को दी जा चुकी हैं। उधर, शहर ही के कई क्षेत्रों में कोविड टीका लगवाने वालों को पैरासिटामॉल की गोली भी नहीं मिल रही है। वार्ड 49 के पार्षद प्रतिनिधि सईद सिद्दीकी ने बताया कि उनके वार्ड में टीके लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों को एक गोली दी जा रही है, जबकि कुछ लोगों को पैरासिटामॉल की गोली नहीं होने की बात कही जा रही है।
पीड़ितों की बात...
- हकीकतनगर निवासी 62 वर्षीय व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पांच जनवरी को पॉजिटिव आई थी। मरीज को खांसी और जुकाम की शिकायत थी। पीड़ित के बेटे ने बताया कि उनके पास केवल एक दिन फोन आया था, जिसमें मरीज की हालत पूछी गई थी। दवा अगले दिन देने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक दवा नहीं पहुंची है। मरीज को बाहर से दवा दिलवाई गई है।
- नागल अहीर निवासी व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट छह दिन पहले आई थी। वह टीबी की जांच कराने पहुंचे थे, जिसके साथ ही उनकी कोरोना की भी जांच की गई, जो पॉजिटिव आई। मरीज के पुत्र ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए कोई दवा अभी तक उनको नहीं मिली है। केवल फोन करके मरीज की हालत के बारे में पूूछा जा रहा है।
होम आइसोलेशन तोड़ काम कर रहे मरीज
कोरोना संक्रमित मिलने के बाद यदि मरीज में सामान्य लक्षण हैं तो उन्हें होम आइसोलेट किया जाता है, लेकिन कई मरीज ऐसे हैं जो इसका पालन नहीं कर रहे हैं। खानआलमपुरा निवासी व्यक्ति नौ मार्च को संक्रमित मिला था, जिसके बाद से वह लगातार मजदूरी कर रहा है। पीड़ित ने बताया कि उसे कोई खास लक्षण नहीं हैं। बच्चों का पेट पालना है इसलिए काम कर रहा है। घर पर रहकर बच्चों का पेट नहीं भर पाएगा।
सभी मरीजों को दी जा रही दवा : नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने बताया कि कोरोना के जितने भी मरीज मिल रहे हैं सभी से टीमें संपर्क कर रही हैं। शत प्रतिशत मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बीते दो दिन में संक्रमित मिले कुछ मरीजों तक दवा नहीं पहुंच सकी है, जिन्हें भी पहुंचाई जा रही है।