सहारनपुर। वैसे तो हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। बात चाहे खेलों की हो या सरकारी अथवा निजी नौकरियों की, हर जगह पर महिलाएं अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। बावजूद अभी राजनीतिक क्षेत्र में बहुत बदलाव की जरूरत है। क्योंकि राजनीतिक पदों पर महिलाएं आसीन तो हो गईं, लेकिन उनके प्रतिनिधियों की सक्रियता बाधक बनती है और महिलाओं को घूंघट में रहने को मजबूर करती है।
वहीं, महिलाओं की समानता की बात की जाए तो अब भी गांव और कस्बों में महिलाओं का उत्पीड़न पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहा है, जबकि महिलाओं के अधिकार और कानून की जानकारी को लेकर मिशन शक्ति अभियान सहित तमाम तरह से जागरूकता लाई जा रही है। बावजूद इसके घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आते हैं, इसका उदाहरण रोजाना एसएसपी दफ्तर और महिला थाने में पहुंचने वाली शिकायतें हैं। इसलिए लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी, महिलाओं को समान अधिकार घर से ही देना होगा, तभी ऐसे मामलों पर अंकुश लगेगा।
जिले में इन प्रमुख पदों पर हैं महिलाएं
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डॉ. अर्चना द्विवेदी, सहायक निदेशक चिकित्सा अनीता जोशी, जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी, जिला वना धिकारी (शिवालिक) श्वेता सेन, उपजिलाधिकारी प्रणेता ऐश्वर्य और जिला अस्पताल की सीएमएस आभा वर्मा के अलावा 10 न्यायिक अधिकारी (जज) महिलाएं हैं। इसके अलावा कचहरी में 150 से ज्यादा महिला अधिवक्ता हैं, पुलिस में महिला कांस्टेबल और उपनिरीक्षकों की संख्या भी काफी है।
महिलाओं की बात
शिल्पी शर्मा निवासी नुमाइश कैंप कहती हैं कि महिलाएं समाज की वास्तविक शिल्पकार होती हैं। महिला घर संभालने के साथ ही अपने हर दायित्व को बखूबी निभाती हैं। महिला का सम्मान किए बगैर किसी भी समाज की उन्नति नहीं हो सकती है। समय बदलने के साथ महिलाएं भी आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध होने लगी हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में काम करने लगी हैं।
----
सम्राट विक्रम कॉलोनी निवासी रीमा शर्मा कहती हैं कि महिला समानता दिवस एक महत्वपूर्ण दिवस है। इस दिवस पर महिलाओं का सम्मान होना अति आवश्यक है। हमारा मानना है कि महिला और पुरुष को एक ही नजर से देखा जाए। आज के समय में महिला भी पुरुषों के साथ हाथ से हाथ मिलाकर चलती हैं।
---
हसनपुर चुंगी के निकट रहने वाली सोनिया कपूर कहती हैं कि महिला समानता दिवस महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। पहले समय में महिलाओं को अपने हक की जानकारी नहीं थी पर आज महिलाएं अपने हकों को लेकर जागरूक हुई हैं। वह अपने जीवन के हर फैसले ले सकती हैं।