इसके चलते निर्वाचन अधिकारी ने मुन्नी देवी को ब्लॉक प्रमुख घोषित कर दिया था। उस वक्त नामांकन पत्र खारिज होने के कारण बबली देवी समर्थकों ने हंगामा किया था। सुनवाई नहीं होने पर बबली देवी ने जिला न्यायालय की शरण ली थी। इसमें मुन्नी देवी, सुमन देवी के अलावा तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी, जिला अधिकारी, प्रदेश सरकार को प्रतिवादी बनाया गया था।