ऐसे तैयार होते हैं गाय के गोबर से दीये
एफपीओ के निदेशक ने बताया कि इन दीयों के निर्माण में 80 फीसदी गाय के गोबर का प्रयोग होता है। इस गोबर को सुखाकर बारीक कर लिया जाता है। इसके बाद उसे छानकर पाउडर बना लेते हैं। इसके बाद ग्वार गम, मुलतानी मिट्टी और चावल के आटा को मिलाकर इसे आपस में गूंथा जाता है। फिर सांचे की सहायता से दीपक तैयार कर सुखाए जाते हैं। एक महिला प्रतिदिन 1500 तक दीपक तैयार कर लेती है।
ट्रेड शो में इसकी रही काफी डिमांड
मोक्षार्थ कृषक उत्पादक संगठन के स्टॉल पर गोमय भस्म, वैदिक चाय, गाय के उपले, गो मूत्र, गेहूं का दलिया और खांड आदि की काफी मांग रही। वैदिक चाय को ब्राह्मी, शंखपुष्पी, नागर मोथा, जायफल, बनफसा, छोटी इलायची, बडी इलायची, लौंग, जावित्री, पुनर्नवा, परिजात के फूल आदि से तैयार किया जाता है।
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