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नहीं सुधरे कई विद्यालयों के हालात

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उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में हुआ जलभराव - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं देने के लिए चल रहा मिशन कायाकल्प भी कई विद्यालयों के हालात नहीं बदल सका है। नतीजा यह है कि मिशन कायाकल्प के तहत जिन विद्यालयों को कवर किया जा चुका है, वह भी बदहाल हैं।
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मिशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में 18 जरूरी कार्य होने हैं, जिनमें सुलभ शौचालय, शुद्ध पेयजल, विद्यालय परिसर में इंटरलॉकिंग टाइलीकरण, कमरों में टाइलीकरण, चहारदीवारी, गेट निर्माण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, हैंडवॉश यूनिट आदि शामिल हैं। जनपद में परिषदीय विद्यालयों की कुल संख्या 1438 है। शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों का दावा है कि 75 फीसदी विद्यालयों में मिशन कायाकल्प पूरा हो चुका है। यानी मिशन कायाकल्प के तहत सभी 18 बिंदुओं को कवर करते हुए विद्यालयों का कायाकल्प कर दिया गया है। मिशन कायाकल्प की हकीकत जानने के लिए जब विद्यालयों का भ्रमण किया गया तो शहरी क्षेत्र ही में विद्यालयों के हालात खराब मिले। गांधी पार्क स्थित परिषदीय विद्यालय, जहां कुछ समय पहले तक नगर शिक्षा अधिकारी भी बैठते थे। उक्त विद्यालय में मिशन कायाकल्प के तहत रंगाई पुताई कराई गई है। शौचालय है, पेयजल की व्यवस्था है। मगर कक्षों का टाइलीकरण नहीं हुआ है। इससे भी बुरी हालत यह है कि विद्यालय परिसर में भी टाइलीकरण नहीं होने से पूरे परिसर में जलभराव की वजह से काई जमी हुई है, जिस पर से पैदल तक चलना मुश्किल है। यह मात्र एक उदाहरण है। जिन विद्यालयों में मिशन कायाकल्प के तहत काम पूर्ण हो चुके हैं। उनमें से भी ज्यादातर विद्यालयों में दो मुख्य बिंदु दिव्यांग सुलभ शौचालय और शत प्रतिशत कक्षों में टाइलीकरण नहीं हुआ है, जबकि रसोई तक में टाइलीकरण के निर्देश हैं। यूरिनल भी ज्यादातर विद्यालयों में नहीं लगे हैं।
करीब 360 विद्यालयों में नहीं पहुंचा मिशन
जनपद में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 1438 है। इनमें प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालय शामिल हैं। जिला समन्वयक निर्माण खुद कह रहे हैं कि जनपद में 75 फीसदी विद्यालय मिशन कायाकल्प के तहत कवर किए जा चुके हैं। यानी 360 विद्यालयों में अभी तक मिशन कायाकल्प के तहत कोई कार्य नहीं हुआ है।
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मिशन कायाकल्प के प्रमुख बिंदु
-विद्युत संयोजन, जिसमें विद्यालय का अपना कनेक्शन, विद्युत मीटर और फिटिंग हो।
-शौचालय की उचित व्यवस्था, बालक और बालिका के लिए अलग-अलग यूरिनल भी हो।
-शौचालय में रनिंग वाटर यानी पानी की सप्लाई हो।
-परिसर में इंटरलॉकिंग टाइलीकरण।
-कक्षों में टाइलीकरण।
-दिव्यांग सुलभ शौचालय।
-मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट लगाना ।
-चहारदीवारी, गेट निर्माण, रंगाई पुताई।
-शुद्ध पेयजल व्यवस्था।
-व्हाइट बोर्ड और बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर आदि।
मिशन कायाकल्प अभी चल रहा है, जिसके तहत विद्यालयों में बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। अभी तक 75 फीसदी विद्यालय कवर किए जा चुके हैं, जिनमें सभी बिंदुओं पर काम हो चुका है। शेष विद्यालयों को जल्द कवर किया जाएगा।
वैभव जैमिनी, जिला समन्वयक, निर्माण।

उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में सूखा पड़ा हैंडपंप- फोटो : SAHARANPUR

उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में मार्ग पर लगा कूड़े का ढेर- फोटो : SAHARANPUR

उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में मार्ग पर लगा कूड़े का ढेर- फोटो : SAHARANPUR

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