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पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन की उत्तम सत्य धर्म की पूजा

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जैन मंदिर मे आयोजित प्रतियोगिता मे प्रश्न पूछते पीयूष जैन - फोटो : SAHARANPUR
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नकुड़/ चिलकाना/ नानौता/ सरसावा (सहारनपुर)। विश्व शांति और कल्याण के महा पर्व पर्वतराज पर्यूषण का पांचवां दिन उत्तम सत्य धर्म की पूजा के साथ प्रारंभ हुआ। इसमें पुष्प दंत भगवान की पूजा के साथ 108 अर्घ्य समर्पित कर बताया गया कि जो सत्य पर अटल है वही साधक है, और ईश्वर को अंतिम सत्य मानना ही उत्तम सत्य है।
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नकुड़ के श्री आदिनाथ जैन दिगंबर मंदिर में पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया। जैन मिलन के अध्यक्ष मुकेश जैन व पंकज जैन ने बताया जैन मिलन द्वारा आयोजित प्रश्न मंच प्रतियोगिता में प्रीतम प्रसाद जैन, संयम जैन, पंकज जैन, प्रतिभा जैन, मानसी जैन, अपूर्वा जैन, आस्था जैन ने प्रतियोगिता संयोजक पीयूष जैन व राजेश जैन द्वारा पूछे धार्मिक और सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर दिया। रजनीश जैन, पीयूष जैन, पंकज जैन, शिवम जैन, संदीप जैन, नीलम, वर्षा, आस्था, निशा जैन, दीपाली, वीना जैन, सरिता जैन रहे।
सुल्तानपुर के जैन मंदिर में उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। जयपुर से आये विद्वान साकेत जैन शास्त्री जी ने कहा जहां क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है , वहीं सत्य, संयम, तप, त्याग जैसे गुण हैं। अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जैन, बिजेंद्र जैन, निशांक जैन, मोहित जैन, अंकुश जैन, गौरव जैन, अनंत जैन, अतिशय जैन, संजय जैन, वीर सेन जैन, राजेश जैन, चंदन जैन, कुसुमलता जैन, ममता जैन, शिमला जैन, तनुजा जैन, पूजा जैन आदि रहे।
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चिलकाना के जैन मंदिर में पं. सुपनेश शास्त्री, राकेश जैन, तरसेम चंद जैन, अनुज जैन, अनुपम जैन, विनय जैन, अनिल कुमार अरविंद जैन रहे। नानौता के जैन मंदिर में राकेश जैन, मनोज जैन, पंकज जैन, उषा जैन, अर्पिता जैन, सार्थक जैन, अंकित जैन, सीमा जैन, निशि जैन, पुष्पा जैन, पूजा जैन, श्रेया जैन, रैना जैन, रेणू जैन, उमा जैन, स्वीटी जैन, सारिका जैन ने उत्तम सत्य धर्म की पूजा की।
सरसावा के दोनों जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व की धूम रही। मंदिरों में नित्य नियम पूजा प्रक्षाल अभिषेक के पश्चात उत्तम शौच धर्म की पूजा की। इसमें महिला पुरुष एवं बच्चों ने वृहद रूप से सामूहिक पूजन आयोजित किया। जैन शास्त्रो %आगम% के विद्वानों ने बताया कि शौच धर्म का अर्थ केवल तन को स्वच्छ करने से नहीं अपितु अपने मन को निर्मल करने से है यदि आपकी आत्मा के कषाय मान लोभ से भरी है तो तन की निर्मलता का कोई महत्व है आपको अपनी आत्मा का शुद्धिकरण करना है, तभी जीवन में सुपथ पर चला जा सकता है। सायंकाल मंदिर में आरती तथा रात्रि में धार्मिक कार्यक्रम हुए।

सुलतानपुर के जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।- फोटो : SAHARANPUR

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