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देवबंद सीट पर रहा ठाकुर बिरादरी का दबदबा

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देवबंद (सहारनपुर)। दुनिया भर के मुस्लिमों के बीच अहम स्थान रखने वाली इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम और हिंदुओं की आस्था के प्रतीक मां बाला सुंदरी देवी मंदिर से पहचानी जाने वाली देवबंद विधान सभा सीट पर आजादी के बाद से अधिकतर राजपूत बिरादरी के विधायक बने हैं। इस बिरादरी के सर्वाधिक 9 बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। वर्तमान में यहां भाजपा विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह भी राजपूत बिरादरी से ही हैं।
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मुस्लिम वोटों का होता रहा बिखराव
वोटों की बात करें तो राजपूत बिरादरी की इस सीट पर करीब 35 हजार वोटर हैं। सबसे ज्यादा करीब 1.05 लाख वोट मुस्लिम हैं। अनुसूचित 40 हजार, गुर्जर तीस हजार, त्यागी 24 हजार, कुम्हार, बढ़ई बीस हजार, कश्यप बीस हजार, वाल्मीकि 15 हजार, सैनी 15 हजार, खटीक 12 हजार, कोरी, ब्राह्मण और वैश्य आठ-आठ हजार तथा पंजाबी अनुमानित चार हजार मतदाता हैं। बावजूद इसके राजपूत समाज से ही इस सीट का पहचान बनी है। दलित, ठाकुर, गुर्जर जातियों की एकजुटता तथा मुस्लिम मतों के बिखराव के चलते राजपूत प्रत्याशी की विधानसभा पहुंचने की राह आसान होती रही है। इस सीट पर किसी परिवार का दबदबा कभी नहीं रहा। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में महावीर सिंह चार और फूल सिंह तीन बार विधायक चुने गए।
ये है प्रमुख मुद्दे
विश्व स्तर पर पहचान के बावजूद देवबंद क्षेत्र में विकास को लेकर बहुत कुछ करना बाकीहै। यहां के प्रमुख मुद्दों में बालिका शिक्षा, रोजगार के उचित साधन न होना, स्वास्थ्य, परिवहन, खेल, मनोरंजन व साहित्य का अभाव, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क व जलभराव की समस्या आम है। मुस्लिम क्षेत्रों की उपेक्षा के आरोपों के साथ ही राजकीय महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाओं के संचालन, रोडवेज डिपो की स्थापना, खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम की मांग लंबे समय से चल रही है। गांव नुनाबड़ी, शब्बीरपुर व कुरलकी केंदुकी के बीच पुलों के निर्माण की मांग भी ग्रामीण लंबे समय से करते चले आ रहे हैं।
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कुल मतदाता 3,47,527
पुरुष मतदाता 1,85,901
महिला मतदाता 1,61,611
थर्ड जेंडर 15
देवबंद सीट पर अब तक बने विधायक
1952 - ठा. फूल सिंह कांग्रेस
1957 - ठा. यशपाल सिंह निर्दलीय
1962 - ठा. फूल सिंह कांग्रेस
1967 - ठा. फूल सिंह कांग्रेस
1969 - ठा. महावीर सिंह कांग्रेस
1974 - महावीर सिंह कांग्रेस
1977 - मौलवी उस्मान जनता पार्टी
1980 - महावीर सिंह कांग्रेस
1985 - महावीर सिंह कांग्रेस
1989 - महावीर राणा कांग्रेस
1991 - विरेंद्र ठाकुर जनता दल
1993 - शशीबाला पुंडीर भाजपा
1996 - सुखबीर सिंह पुंडीर भाजपा
2002 - राजेंद्र सिंह राणा बसपा
2007 - मनोज चौधरी बसपा
2012 - राजेंद्र सिंह राणा सपा
2016 - राजेंद्र सिंह राणा की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में माविया अली कांग्रेस
2017- कुंवर ब्रिजेश सिंह भाजपा
विधान सभा क्षेत्र में कराए रिकार्ड विकास कार्य
शाहपुर में 220 केवी बिजलीघर का निर्माण, नानौता से मंगलौर मार्ग (उत्तराखंड सीमा) तक स्टेट हाईवे घोषित कराते हुए उसका निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य, जड़ौदापांडा क्षेत्र में नल्हेड़ा माइनर में टेल तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों की लागत से दो परियोजनाओं की स्वीकृति, देवबंद से अंबेहटा मोहन, सिड़की से झबरेड़ा मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण, बड़गांव में महाराणा प्रताप चौक का चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण, भवनपुर से धर्मपुर के बीच काली नदी पर सेतु का निर्माण, मिरगपुर में सिद्धबाबा फकीरा दास की समाधि स्थल का सुंदरीकरण कराया। रणखंडी व जड़ोदापांडा सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना कराई।
- कुंवर बृजेश सिंह, विधायक देवबंद
देवबंद विधानसभा क्षेत्र में पिछले पौने पांच साल के भाजपा शासन में धरातल पर कोई विकास कार्य नजर नहीं आया। विधायक न तो देवबंद सीएचसी में आज तक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवा पाए न ही बच्चों के लिए खेल मैदान बनवा सके। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाएं भी संचालित नहीं हो पाई। कालीपार क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग सुविधाओं का अभाव है। सरकार ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। फुलास अकबरपुर में पीएचसी बनी है लेकिन वह नाम की है क्योंकि वहां स्टाफ ही तैनात नहीं है। भाजपा सरकार अपने वायदों पर खरी नहीं उतरी। देवबंद विधानसभा की पूरी तरह अनदेखी की गई।
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माजिद अली गत चुनाव में बसपा प्रत्याशी

श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर- फोटो : SAHARANPUR

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