सहारनपुर। एटीएस द्वारा पकड़े गए दारुल उलूम देवबंद में पढ़ने वाले बांग्लादेशी छात्र तलहा को कोर्ट से कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ करेगी। एटीएस यह जानेगी कि उसने मेघालय राज्य से फर्जी आधार कार्ड कैसे बनाया, साथ ही एटीएस इसके भारतीय नेटवर्क के संबंध में भी गहनता से जांच कर रही है।
बांग्लादेश का निवासी तलहा तालुकदार बिन फारुख वर्ष 2015 से देवबंद में रह रहा था। उसने मेघालय राज्य से फर्जी आधार कार्ड आदि दस्तावेज बनवा कर दारुल उलूम में दाखिला लिया था। वह दारुल उलूम के ही छात्रावास के कमरा नंबर 61 में रह रहा था। आखिरकार वह सात साल बाद एटीएस के हत्थे चढ़ गया। उसके देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने की जानकारी के बाद एटीएस ने उसे पूछताछ के बाद बांग्लादेशी होने के सबूत मिलने पर गिरफ्तार किया। एटीएस के अनुसार तलहा को कोर्ट से कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाएगी, आखिर उसने फर्जी दस्तावेज कैसे और किस से बनवाए है। उनके यहां के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
छात्र के बारे में कराई जा रही जांच : मद्रासी
- अब छात्रों के दस्तावेजों की एलआईयू जांच कराई जा रही
देवबंद। एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए छात्र तलहा को लेकर दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। एटीएस ने ही इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अभी ईद की छुट्टियों के चलते संस्था के सभी कार्यालय बंद हैं। जिसके चलते गिरफ्तार छात्र के बारे में कुछ बताया नहीं जा सकता। फिर भी जांच कराई जा रही है। यदि उक्त छात्र यहां पढ़ता था तो उसने अपने भारतीय दस्तावेज ही संस्था में जमा कराए होंगे। मद्रासी ने बताया कि इस वर्ष से एडमिशन के मामले में संस्था द्वारा नियमों को सख्त कर दिया गया है। अब छात्र जो भी दस्तावेज जमा कराएंगे उसे सत्यापन के लिए खुफिया विभाग के पास भेजा जाएगा। गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। मद्रासी का यह भी कहना है कि एटीएस ने छात्र तलहा को कहीं बाहर से पकड़ा है। संस्था में किसी प्रकार की कोई कार्रवाई एटीएस द्वारा नहीं की गई।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं बांग्लादेशी नागरिक
देवबंद। एटीएस पहले भी बांग्लादेशी नागरिकों पकड़ चुकी है। वर्ष 2018 और वर्ष 2019 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवास कर रहे बांग्लादेशी नागरिकों को एटीएस गिरफ्तार कर चुकी है। वर्ष 2019 में पकड़े गए पांच बांग्लादेशी नागरिकों के संबंध बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन से निकले थे। जिन्हें बाद में जेल भेज दिया गया था। इस वर्ष 12 मार्च को भी एटीएस ने दारुल उलूम चौक स्थित नजमी मंजिल (प्राइवेट छात्रावास) के कमरा नंबर 19 से आतंकी गतिविधियों में लिप्त झारखंड निवासी इनामुलहक को गिरफ्तार किया था। उसके पास जो दस्तावेज बरामद हुए थे वह फैज-उल-हक नाम के थे। जिसमें उसने खुद को तेलंगाना का निवासी दर्शाया था।
स्थानीय खुफिया विभाग सोया, एटीएस सक्रिय
देवबंद। पिछले कुछ सालों में देवबंद में बांग्लादेशी नागरिकों के होने की सूचना मिलने के मामले में एटीएस सक्रिय दिखाई दिया, जबकि स्थानीय खुफिया विभाग के अधिकारी फिसड्डी साबित हो रहे हैं। कोतवाली परिसर में बना खुफिया विभाग का कार्यालय अधिकांश समय बंद ही मिलता है। एक या दो लोगों की यहां तैनाती है, लेकिन वह कब मिलते हैं ये किसी को नहीं पता। जिसके चलते एटीएस को अधिकांश सूचनाएं पहुंचती है और वह यहां आकर कार्रवाई भी करती है।