जांच कमेटी के सामने उपस्थित हुए निलंबित एमबीबीएस छात्र
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सरसावा (सहारनपुर)। राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुए मारपीट प्रकरण में निलंबित दस छात्र अभिभावकों के साथ जांच कमेटी के सामने उपस्थित हुए। जहां प्राचार्य ने जांच कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय से अभिभावकों को अवगत कराया।
बृहस्पतिवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में 16 नवंबर को हुए मारपीट प्रकरण में शामिल रहे 27 निलंबित छात्रों में से 10 छात्र अभिभावकों के साथ उपस्थित हुए। जांच कमेटी तथा अभिभावकों के बीच हुई वार्ता में प्राचार्य के समक्ष कई अभिभावकों ने बताया कि उन्हें तो अभी तक इस प्रकरण की जानकारी भी नहीं है जिस पर प्राचार्य ने जांच कमेटी द्वारा अभिभावकों को तीन बार समय देने संबंधित समस्त प्रपत्र दिखाते हुए बताया कि सभी निलंबित छात्रों को पहले दिन से ही अभिभावकों को प्रकरण बताकर उनके साथ आने के लिए कहा जा रहा था। अगर आरोपी निलंबित छात्र अभिभावकों से ये बात छिपा रहे हैं तो इसमें स्पष्ट है कि अभिभावकों का भी अपने बच्चों पर कोई नियंत्रण नहीं है, जो बेहद गंभीर विषय है।
काफी देर चली वार्ता में प्राचार्य ने अभिभावकों को स्पष्ट बताया कि जांच कमेटी द्वारा एकमत से निर्णय लिया गया है कि सभी निलंबित छात्र 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड वेलफेयर फंड में जमा कराएंगे, साथ ही भविष्य में किसी भी विवाद में शामिल नहीं होने का शपथ पत्र भी देंगे। छात्रावास से बिजली के भारी उपकरण एवं चार पहिया वाहनों को भी अपने घर वापस भेजेंगे, तभी उनका निलंबन वापस हो पाएगा।
प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि सभी 27 छात्र निलंबित है। अभी तक एक भी अभिभावक ने जांच कमेटी के द्वारा तय किए गए निर्णय के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसके जिम्मेदार अब अभिभावक हैं।
ये था मामला
16 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के परिसर में बने खेल मैदान में वॉलीबाल खेलने को लेकर 2018 तथा 2019 बैच के एमबीबीएस छात्रों के बीच विवाद हो गया था, जो हिंसक संघर्ष में बदल गया था। छात्रों द्वारा दूसरे के छात्रावासों में घुसकर भी मारपीट तथा पथराव करने के गंभीर आरोप लगे थे। प्राचार्य की सूचना के बाद मौके पर पुलिस तथा पीएसी ने आकर मामले को संभाला था। उक्त विवाद के बाद वीडियो फुटेज तथा फोटो के आधार पर 2018 तथा 2019 बैच के 27 छात्रों को निलंबित करते हुए अभिभावकों के साथ प्रस्तुत होने के लिए नोटिस जारी किया गया था।