उन्होंने कहा कि भारत एक विविधता में एकता का देश है, जहां हर धर्म और समुदाय को स्वतंत्रता का पूरा अधिकार है। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि न्यायपालिका हमारे देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए एक मिसाल है। तंजीम इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जितना स्वागत किया जाए वे कम है।
शासन प्रशासन का यह फैसला संविधान नहीं बल्कि आस्था की बुनियाद लिया गया फैसला था। जिसकी वजह से हिंदू-मुस्लिमों के बीच नफरत को बढ़ावा मिल रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए यह बता दिया कि देश आस्था की आस्था से नहीं बल्कि संविधान से चलता है। उन्होंने कहा कि फैसले से समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा और यह हमारी एकता को और मजबूत करेगा।