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मेहनत के पसीने से तकदीर चमका रहे विद्यार्थी

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बंटी कुमार - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। राजकीय आईटीआई दिल्ली रोड की जिन वर्कशॉप में दो साल पहले तक मशीनें और उपकरण धूल फांक रहे थे, आज वहां विद्यार्थी मेहनत के पसीने से अपनी तकदीर चमका रहे हैं। सुबह नौ बजे से सायं चार बजे तक विद्यार्थियों के अलग-अलग वर्ग कड़ी मेहनत करते नजर आ जाएंगे।
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राजकीय आईटीआई दिल्ली रोड के साथ राजकीय आईटीआई साढ़ौली कदीम को भी संबद्ध किया है, इसलिए दिल्ली रोड की आईटीई में दोनों जगह के विद्यार्थी प्रशिक्षण पा रहे हैं। दो वर्ष पहले वर्कशॉप में रखी मशीनें और उपकरण धूल फांक रहे थे। वर्कशॉप में दिन भर बंदरों का आतंक रहता था। अब विद्यार्थियों को वर्कशॉप और लैब आदि में काम करते देखा सकता है। मंगलवार को जिस समय अमर उजाला की टीम वर्कशॉप पहुंची। उस समय भी छात्र और छात्राएं आरी से लोहे के बड़े टुकड़ों को काट रहे थे। ऐसा करते हुए ज्यादातर विद्यार्थियों के माथे पर पसीना था। साथ ही शिक्षक उनके काम पर नजर रख रहे थे। छात्रों का कहना है कि बीते कुछ समय से पढ़ाई और प्रशिक्षण में सुधार आया है।
इतनी वर्कशॉप और लैब
राजकीय आईटीआई दिल्ली रोड परिसर में मेकेनिकल और वेल्डर ट्रेड के विद्यार्थियों के लिए दो वर्कशॉप हैं। मेकेनिकल वर्कशॉप में उपकरणों के साथ ही ट्रैक्टर, कार और चौपहिया वाहनों के नए इंजन तक उपलब्ध हैं, जिन पर विद्यार्थी काम करते हैं। इनके अलावा कंप्यूटर की तीन लैब और इलेक्ट्रिकल की दो वर्कशॉप हैं।
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1500 विद्यार्थी पा रहे प्रशिक्षण
राजकीय आईटीआई में करीब 1500 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें प्रथम वर्ष के 588 और द्वितीय वर्ष के 350 विद्यार्थी शामिल हैं। साथ ही राजकीय आईटीआई साढ़ौली कदीम के करीब 500 विद्यार्थी भी इनमें शामिल हैं।
आईटीआई में कुल 18 ट्रेड
राजकीय आईटीआई में कुल 18 ट्रेड हैं। इनमें इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मोटर मैकेनिक, वायरमैन, वेल्डर, मशीनिस्ट, टर्नर, रेफ्रिजरेशन, स्टेनो हिंदी, स्टेनो अंग्रेजी, कटिंग एंड सिलाई, फैशन एंड डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि प्रमुख हैं।
छात्रों की बात
फिटर में आईटीआई कर रहे बंटी ने बताया कि आईटीआई में चीजें काफी सुधरी हैं। थ्योरी के साथ ही प्रशिक्षण में कड़ी मेहनत कराई जा रही है। प्रशिक्षण में शिक्षकों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
सहदेव ने बताया कि वह राजकीय आईटीआई साढ़ौली कदीम के विद्यार्थी हैं। मगर यहां संबद्ध होने की वजह से प्रशिक्षण यहीं चल रहा है। वर्कशॉप में दो से तीन घंटे बिताए जा रहे हैं, जिससे काफी सीखने को मिल रहा है।
हिंदी स्टेनो में आईटीआई कर रही नेहा का कहना है कि आईटीआई में विद्यार्थियों से कड़ी मेहनत कराई जा रही है। यदि किसी को आईटीआई करनी है तो राजकीय आईटीआई से बेहतर विकल्प नहीं हो सकता।
मनीषा ने बताया कि पढ़ाई के साथ ही आईटीआई का माहौल भी अच्छा है। शिक्षकों का पूरा सहयोग मिल रहा है। यही वजह है कि अधिक से अधिक विद्यार्थी प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
आईटीआई में यदि विद्यार्थी थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल ना करें तो पढ़ाई बेकार है। मंशा यही है कि जब विद्यार्थी आईटीआई पूर्ण करके निकलें तो वह नौकरी करने के लिए पूरी तरह तैयार हों। उसे किसी अन्य प्रशिक्षण की जरूरत ना पड़े। - वीपी सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय आईटीआई।

शहदेव- फोटो : SAHARANPUR

नेहा- फोटो : SAHARANPUR

मनीषा- फोटो : SAHARANPUR

प्रधानाचार्य वीपी सिंह- फोटो : SAHARANPUR

दिल्ली रोड़ आईटीआई में वर्कशॉप में ट्रेनिंग लेते छात्र छात्राएं- फोटो : SAHARANPUR

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