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Saharanpur News: जिले में मिट्टी की सेहत पर संकट, जीवांश कार्बन घटा

Sat, 07 Mar 2026 12:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। फसल चक्र की अनदेखी और अंधाधुंध रासायनिक खाद के इस्तेमाल से जिले की मिट्टी बेजान हो रही है। इसका असर फसलों के पोषण के लिए सबसे जरूरी जीवांश कार्बन की मात्रा पर भी पड़ रहा है। जिले की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा 0.1 से 0.5 फीसदी रह गई है। यह सामान्य से कम है।
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मंडलीय लैब के वरिष्ठ अधिकारी रविंद्र बताते हैं कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत सहारनपुर मंडल में वर्ष 2025-26 में कुल 50 हजार मृदा नमूनों की जांच का लक्ष्य मिला था। सहारनपुर के 500 गांवों में सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए। जांच के बाद जीवांश कार्बन की मात्रा काफी कम मिली है। जीवांश कार्बन 0.1 से 0.5 स्तर पर पाया गया, जो कि सामान्य तौर पर 0.5 से 0.8 स्तर पर होना चाहिए। इसके साथ ही मुजफ्फराबाद, नकुड़, जानसठ, थानाभवन, कांधला में जिंक सूक्ष्म तत्व की भी कमी पाई गई। इसके अलावा आयरन, बोरान, कॉपर, मैग्नीज पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।

- मृदा स्वास्थ्य पर जीवांश कार्बन की कमी का पड़ता है असर

उप कृषि निदेशक डॉ. संदीप पाल के अनुसार, जीवांश कार्बन एक तरह से भूमि की जान होती है। जीवांश कार्बन कम होने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं। कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम समेत अन्य पोषक तत्व होते हैं। कवक के धागे मिट्टी के कणों को बांधकर रखते हैं। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है।
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- अवश्य बनवाएं सॉयल हेल्थ कार्ड
अधिकारियों के अनुसार, किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड अवश्य बनवाना चाहिए। इसके लिए नजदीकी कृषि विभाग, ब्लॉक कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। वैज्ञानिक खेत में अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने लेते हैं। इन्हें जियो टैग किया जाता है। साथ ही हर खेत स्वस्थ रहे पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण भी किया जा सकता है। दो-तीन वर्ष के चक्र में मुफ्त कार्ड दिया जाता है।
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इन बातों का रखे किसान ध्यान

- हरी खाद जैसे ढैंचा, सनई आदि की बुवाई करें
- फसल चक्र अवश्य बनाए। धान, गेहूं और गन्ना के बाद तिलहनी व दलहनी फसल जैसे मटर, चना, मूंग आदि की बुवाई करें

- फसल अवशेष को कतई न जलाएं। खेत में डिकंपोजर का प्रयोग करें

- गोबर, वर्मी कंपोस्ट की खाद की इस्तेमाल करें

- सीमित मात्रा में जरूरत के अनुसार रासायनिक खाद का इस्तेमाल करें

- समय-समय पर मिट्टी का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं
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