डॉ. सिंह ने बताया कि फंगल इंफेक्शन सबसे शरीर के पसीना रुकने वाले स्थानों पर अधिक होता है, जैसे बगल, जांघ, छाती का निचला भाग और उंगलियों का बीच। इसके बाद करीब 30 फीसदी मरीज स्केबीज के हैं। इन मरीजों को उंगलियों के बीच, चेहरे पर या शरीर के अन्य जगहों पर दाने बन जाते हैं। डॉ. केवी सिंह की सलाह है कि त्वचा रोगों से बचने को योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं। पसीना आने वाले शहरी के स्थानों को सूखा रखें, जिसके लिए पाउडर का इस्तेमाल करें।
होली के बाद बढ़े मामले
डॉ. केवी सिंह ने बताया कि बाजार में केमिकलयुक्त रंग आ रहे हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। होली के बाद कई ऐसे मरीज आए हैं, जिनको पहले त्वचा की एलर्जी नहीं थी और होली खेलने के बाद चेहरे पर दाने निकल आए हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी की समस्या थी वो केमिकल रंगों से बढ़ गई है।
फंगल इंफेक्शन से बचने को यह करें
- प्रतिदिन ताजे और ठंडे पानी से नहाएं, टैंक और गीजर का पानी इस्तेमाल न करें।
- नहाने के पानी में एंटीसेप्टिक की बूंदें डालें।
- त्वचा के लिए एंटीबैक्टीरियल साबुन का प्रयोग करें।
- झोलाछाप से इलाज न कराएं, अपनी मर्जी से दवा न लें।
- पहले से इंफेक्शन है तो पहनने के कपड़ों को गर्म पानी में उबालकर धुलें और धूप में अच्छे से सुखाएं।
- अंडर गारमेंट प्रतिदिन बदलें, तौलिए को धूप में अच्छे से सुखाएं।
- इंफेक्शन से ग्रसित मरीज के कपड़ों को परिजनों के कपड़ों से अलग धुलें।
- शरीर के कोमल हिस्सों जैैसे बगल, जांघ और उंगलियों के बीच के हिस्से को साफ और सूखा रखें।
- गर्मियों में हल्के रंग के सूती और ढीले-ढाले कपड़े पहनें।
- टाइट कपड़े न पहनें, जींस भी पहनने से बचें।
- मीठा, लाल मिर्च और तेज मसालेदार खाने से बचें।