मौलाना अरशद मदनी ने यह भी कहा कि मुसलमान अपनी सुस्ती और लापरवाही के कारण नमाज नहीं पढ़ते, रोजा नहीं रखते तो इसका अर्थ यह नहीं है कि नमाज और रोजा अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यूनिफार्म लागू करने का अधिकार स्कूलों की हद तक सीमित है जो मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था वह स्कूल का नहीं कॉलेज का था। इसलिए नियमों के अनुसार कॉलेज को अपनी ओर से यूनिफार्म लागू करने का अधिकार नहीं है।
मौलाना अरशद मदनी ने यह दिए तर्क
मौलाना अरशद मदनी ने हिजाब को इस्लाम का हिस्सा न मानने वाले कोर्ट के फैसले पर कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संविधान के आर्टिकल-25 और इसके उप-खंडों के अंतर्गत जो अधिकार प्राप्त हैं, वह संविधान में इस बात की गारंटी देता है कि देश के हर नागरिक को धर्म के अनुसार आस्था रखने, धार्मिक नियमों का पालन करने और इबादत की पूर्ण स्वतंत्रता है। भारत सरकार या राज्य सरकार का अपना कोई सरकारी धर्म नहीं है।
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उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति या समुदाय अपनी धार्मिक पहचान जाहिर न करे, धर्मनिरपेक्षता में यह बात अवश्य दाखिल है कि सरकार किसी विशेष धर्म की पहचान को सभी नागरिकों पर न थोपे। हिजाब एक धार्मिक कर्तव्य है, जिसका आधार कुरआन और सुन्नत है वही हमारी स्वाभाविक और तर्कसंगत आवश्यकता है।