सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों का राज नहीं खुला है। इस मामले में अभी तक यह पता नहीं लग पाया है कि करेंसी चेस्ट में नकली नोट कहां से आए थे। अब तक एक नामजद समेत सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दो नामजद आरोपी अभी भी एनआईए की पकड़ से दूर है।
29 अगस्त को नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने कोतवाली सदर बाजार में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में मंडल कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और अमित कुमार को नामजद किया था। करेंसी चेस्ट की जांच करने पर 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिले थे। पहले बैंक, पुलिस और एसआईटी ने जांच की। इसके बाद तीन सितंबर को एनआईए ने जांच को अपने हाथों ले लिया था।
एनआईए प्रबंधक अमित कुमार के अलावा संपर्क में रहने वाले आदेश चौधरी, मुकेश कुमार, राजेंद्र कुमार, नीटू को पकड़ चुकी है। बृहस्पतिवार को भी दो और आरोपी अजय कुमार, हरीश रौंटा गिरफ्तार हो चुके हैं। जिन आरोपियों को एनआईए ने गिरफ्तार किया है, उनसे करेंसी चेस्ट में नकली नोट आने का राज नहीं खुल पाया है। अब सुशील शर्मा और रवि कुमार कांसे की गिरफ्तारी पर नजर टिकी हुई है। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि जब नामजद आरोपी अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद नकली नोटों के स्रोत का पता नहीं चल सका तो क्या बाकी दोनों नामजद आरोपियों के पकड़ने से स्रोत की जानकारी मिल पाएगी। दो नामजद आरोपियों का लंबे समय से गिरफ्त से बाहर रहना भी सवाल खड़े कर रहा है। क्या एनआईए को उनके ठिकानों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
नकली नोटों के स्रोत तक पहुंचना चुनौती
मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी बाकी आरोपियों और संदिग्धों की तलाश के साथ पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में जुटी है। जांच का अहम पहलू यह पता लगाना भी है कि नकली नोट कहां छापे गए, उन्हें किसने तैयार किया और किन माध्यमों से बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाया गया। अभी तक नामजद आरोपी बैंक अधिकारी सुशील शर्मा और रवि कुमार कांसे एनआईए की पकड़ से दूर है।