हिजाब को लेकर आए कर्नाटक के हाईकोर्ट के फैसले का सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने स्वागत किया है।
सहारनपुर निवासी फरहा फैज ने कहा कि इससे पूर्व 2018 में भी केरल हाईकोर्ट ने दो छात्राओं की याचिका, जो स्कूल में स्कार्फ ओढ़ने और पूरी आस्तीन की कमीज पहनने को लेकर दायर की गई थी, उसको भी खारिज करते हुए मौलिक अधिकारों को स्पष्ट किया था। आज फिर से कर्नाटक हाईकोर्ट ने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए अपना फैसला दिया है।
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उन्होंने कहा कि यह मामला केवल स्कूल कॉलेज की वेशभूषा से जुड़ा मामला था, जिसको कट्टरपंथियों ने मजहबी रंग देकर पूरे देश में गलत संदेश दिया है। स्कूलों को अपने यहां यूनिफॉर्म तय करने का, अपने कोड ऑफ कंडक्ट को बनाने का पूरा अधिकार है। यदि हिजाब इस्लाम का मूलभूत हिस्सा होता तो यह आर्टिकल 25 में उसी तरह संरक्षित होता, जैसे सिख समाज की पगड़ी है, लेकिन इस्लाम के पांच मूलभूत सिद्धांत तोहिद, नमाज, हज, रोजा और जकात हैं, जो आर्टिकल 25 में संरक्षित है।
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