सहारनपुर। जिला पंचायत में वित्तीय नियमों को दरकिनार कर साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वित्तीय परामर्शदाता की स्वीकृति के बिना ही कुछ ठेकेदारों के बिल पास कर रकम जारी कर दी गई। इतना ही नहीं, परामर्शदाता की अनुपस्थिति में फाइलें निपटाने और बाद में उनका तबादला आदेश थमा देने से पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है।
देहरादून के रहने वाले आरएस नेगी ने यह पूरा मामला उठाया। उनकी तरफ से शासन के अलावा मंडलायुक्त व अन्य अधिकारियों को शिकायत दी गई। शिकायत में बताया कि जिला पंचायत में ठेकेदारों के भुगतान को लेकर प्रक्रिया निर्धारित है। यदि भुगतान करना होता है तो सबसे पहले पटल बाबू, जेई, इंजीनियर, एएमए और फिर अध्यक्ष के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद अकाउंट और फिर वित्तीय परामर्शदाता के पास होते हुए फाइल वापस आती है, तब भुगतान होता है। वित्तीय परामर्श दाता यदि हस्ताक्षर न करें तो भुगतान किसी भी हालत में नहीं हो सकता, लेकिन जिला पंचायत से मई माह में करीब साढ़े चार करोड़ से अधिक का भुगतान वित्तीय परामर्शदाता के हस्ताक्षर बिना कर दिया गया।
यहां तक कि वित्तीय परामर्शदाता की अनुपस्थिति में उनके लेखा विभाग कार्यालय में तैनात कर्मियों ने भी फाइलों को चेक कर स्वीकृति दे दी। आरोप लगाया कि जिला पंचायत में वित्तीय अनियमितता हो रही है और मनमाने ढंग से अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए भुगतान निकाला जा रहा है। उधर, जिला पंचायत के निवर्तमान अध्यक्ष व प्रशासक मांगेराम चौधरी ने इस प्रकरण की जानकारी से इन्कार किया है।
कार्यालय पहुंचते ही थमाया तबादले का आदेश
मई माह में जब भुगतान की फाइल को प्रक्रिया में लाया गया उस दिन वित्तीय परामर्शदाता शिवानी शर्मा कार्यालय में नहीं थीं। इसी दौरान ठेकेदारों के भुगतान की फाइल तैयार की गई। वित्तीय परामर्शदाता की गैर मौजूदगी में भुगतान के सभी दस्तावेज पूरे कर लिए गए। कुछ दिन बाद जब वित्तीय परामर्शदाता कार्यालय पहुंचीं तो पूरे मामले का पता चला। तभी उन्हें बताया गया कि उनका यहां से तबादला हो गया है। इसके साथ ही उनके हाथ में तबादले के आदेश दे दिए गए। इससे पूरे मामले फर्जीवाड़े की आशंका हो रही है।
शासन ने भी मांगी रिपोर्ट
मामले की शिकायत शासन में भी गई थी। बताया जा रहा है कि मंगलवार को शासन की तरफ से भी पूरे प्रकरण को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। यह महज एक मानवीय चूक है या फिर बड़ा फर्जीवाड़ा, इसका जांच के बाद ही पता चलेगा।
कुछ इस तरह किए गए भुगतान
- नकुड़ ब्लॉक में गांव शुक्रताल में मिट्टी खड़ंजा कार्य के लिए 327719 रुपयों का भुगतान किया गया।
- नागल ब्लॉक के गांव जगदेई में मिट्टी खड़ंजा कार्य के लिए 355777 रुपयों का भुगतान हुआ।
- गांव दंभेड़ा में में मिट्टी खड़ंजा निर्माण के लिए 987153 रुपयों का भुगतान किया गया।
- साढ़ौली कदीम ब्लॉक के हिंदुवाला गांव में सीसी रोड के निर्माण के लिए 803580 रुपयों का भुगतान हुआ।
नोट : इसी तरह अन्य ठेकेदारों के भुगतान किए गए।
वर्जन
इस पूरे मामले में शिकायत के बाद जांच समिति बनाई गई है, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी व अन्य शामिल हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- अरविंद कुमार चौहान