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सहारनपुर को नाज है वीर सपूतों के गांव भगवानपुर पर

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गांव में लगी शहीद जयद्रथ सिंह की प्रतिमा - फोटो : SAHARANPUR
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बड़गांव (सहारनपुर)। जिले को वीर सपूतों के गांव भगवानपुर पर नाज है। इस गांव की मिट्टी ने एक दो नहीं बल्कि देश की सीमा पर सुरक्षा के लिए जवानों की एक फौज दे दी है। इस गांव के हर दूसरे परिवार का एक लाल सीमा पर प्रहरी बनकर खड़ा हुआ है। इस गांव ने वीर जयद्रथ जैसा बलिदानी सपूत भी दिया है। जिसने जम्मू के सुंदरबनी क्षेत्र में दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। जिस पर पूरे गांव को आज भी गर्व है।
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भगवानपुर की माटी में देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी है। शायद यही वजह है कि गांव में हर दूसरे घर से सेना में जवान है। करीब दो हजार की आबादी वाले इस छोटे से गांव से भारतीय सेना में करीब 70 जवान जम्मू कश्मीर सहित देश की विभिन्न सीमाओं पर तैनात हैं। गांव के अधिकतर युवक राजपूत रेजीमेंट में रायफल मैन के पद पर तैनात हैं। बहुत से परिवार तो ऐसे हैं, जिनके दो या तीन युवक मां भारती की रक्षा में जुटे हैं। बीस से ज्यादा सेवानिवृत्त सैनिक भी इस गांव में हैं।
गांव के रणबांकुरे तिरंगे की शान में अपने प्राणों का बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटते। दो साल पूर्व 21 जुलाई 2017 को गांव के ठाकुर जसवीर सिंह के बेटे जयद्रथ सिंह ने जम्मू कश्मीर के सुंदरबनी इलाके में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। जवान बेटे की शहादत को याद कर पिता जसवीर की आंखें तो एक बारगी नम हो जाती हैं, लेकिन बेटे की बहादुरी को याद कर सीना चौड़ा हो जाता है। पूरा गांव शहीद के बलिदान पर खुद को गौरवान्वित करता है। जयद्रथ का छोटा भाई अर्जुन भी सेना में है। वह हाल में कश्मीर के पुलवामा में तैनात है।
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देश सेवा का जुनून है गांव के युवाओं में
ग्राम प्रधान के पति रतन सिंह कहते हैं कि जयद्रथ सिंह के शहीद होने के बाद से तो गांव के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जुनून सा हो गया है। दर्जनों युवा अभी भी सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। इन युवाओं में शामिल गांव के नीरज, मोहित, शेखर उर्फ शेखू, राम कुमार और श्याम सिंह आदि का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा करना है, अन्य सरकारी नौकरियों में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। गांव के कान सिंह राणा कहते हैं कि गांव के युवाओं के मोबाइल की कालर ट्यून भी देश भक्ति के गानों वाली है। सेना में तैनात जवान जब घर छुट्टियों पर आते हैं, तो गांव के युवा घंटों तक उनसे भर्ती के लिए टिप्स लेते देखे जा सकते हैं। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक श्याम सिंह के दो बेटे सेना में तैनात हैं। उनका कहना है कि वह अपनी अगली पीढ़ी को भी देश सेवा करते ही देखना चाहते हैं।

बड़गांव के भगवानपुर में बना शहीद जयद्रथ सिंह स्मृति द्वार- फोटो : SAHARANPUR

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