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रोजा अमीरों को भी कराता है भूख का अहसास

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रोजा अमीरों को कराता है गरीबों की भूख का अहसास
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा रोजा अमीरों को गरीबों की भूख का भी अहसास कराता है। रोजा अमीरों को बताता है कि भूख के समय गरीबों पर क्या गुजरती है। रोजा जहां एक इबादत है, वहीं अपने जिस्म को तंदुरुस्त रखने का इलाज भी है, जिस तरह लोग आजकल डायटिंग कर के खुद को स्वस्थ करने की कोशिश करते हैं। वैसे रोजे को डायटिंग समझकर नहीं रखना चाहिए बल्कि सिर्फ अल्लाह की इबादत समझकर रखना चाहिए। वरना रोजा कुबूल नहीं होगा।
सवाल- हसनपुर से सलीम ने पूछा की कि उनके पिता जिस मस्जिद में ऐतेकाफ में बैठे हैं, उसमें नहाने का कोई खास इंतजाम नहीं है। आज कल मौसम में काफी गर्मी है। क्या वह मस्जिद से बाहर नहाने जा सकते हैं। इससे ऐतेकाफ पर कोई असर तो नहीं आएगा।
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जवाब- शरीयत के अनुसार अगर कोई व्यक्ति ऐतेकाफ में बैठा है और वह सिर्फ ठंडक की नीयत से नहाने के लिए मस्जिद से बाहर जाता है तो यह किसी भी व्यक्ति के लिए जायज नहीं है।
सवाल- बिजनौर के नगीना निवासी अनवारूलहक ने पूछा कि उनके छोटे भाई पहली बार ऐतेकाफ में बैठे हैं। वो पूछना चाहते हैं कि इसमें कोई खास इबादत शरीयत की जानिब से मुकर्रर तो नहीं है। अगर है तो वह क्या है।
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जवाब- शरीयत के अनुसार ऐतेकाफ में कोई खास इबादत की शर्त नहीं बताई गई है। ऐतेकाफ में बैठे व्यक्ति को नमाज, कुरान-ए- करीम की तिलावत या दीन की पुस्तकों को पढ़ना या सुनना चाहिए और खूब इबादत करनी चाहिए।
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